पिता
घर का मान घर का सम्मान है पिता
घर की पूंजी घर की पहचान है पिता
अपने जीवन को भूलकर, बनाये हमारा जीवन
वो है पिता…
हमारी खुशी में खुश, हमारे दुख में दुखी
वो है पिता…
घर की जान घर की शान है पिता
हमारे शौक को बनाये अपना शौक
वो है पिता…
हमारा दिल हमारी जान है पिता
माँ का गुरुर उसका सिंदूर है पिता
मोम से दिल रखकर भी, पत्थर दिल बनकर दिखाए
वो है पिता…
बस कुछ ना कहो हर घर का संसार है
पिता…।।।
अंजलि रुहेला
अंबेहटा पीर(सहारनपुर)
(यदि आपके पास भी अपनी कोई ऐसी मौलिक रचना कविता, गीत, कहानी, लघुकथा है तो भारत नमन को उसके प्रकाशन में गर्व महसूस होगा। )
