उत्तराखंड राजभवन एक बार फिर रंग-बिरंगे फूलों की महक से गुलजार होने को तैयार है। वसंतोत्सव 2025 का आयोजन इस वर्ष 7 से 9 मार्च तक होगा। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने सोमवार को राजभवन में वसंतोत्सव की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस साल ‘जटामांसी’ को विशेष पोस्टल कवर के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि यह उत्सव उत्तराखंड की सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विरासत को एक साथ प्रदर्शित करने का प्रमुख माध्यम बन चुका है। उन्होंने बताया कि वसंतोत्सव स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, कुटीर उद्योगों और पुष्प पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अहम मंच है।
राज्य को ‘पुष्प प्रदेश’ बनाने की दिशा में कदम
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की जलवायु दुर्लभ और औषधीय फूलों के लिए बेहद अनुकूल है। इस उत्सव के माध्यम से प्रदेश को ‘पुष्प प्रदेश’ के रूप में पहचान दिलाने और ग्रीन टूरिज्म को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
महिला उद्यमियों और दिव्यांगों के लिए विशेष उपश्रेणियां
इस वर्ष वसंतोत्सव की प्रतियोगिताओं में महिला पुष्प उत्पादकों और दिव्यांग प्रतिभागियों के लिए विशेष उपश्रेणियां जोड़ी गई हैं। इसके साथ ही कट फ्लावर, बोनसाई, कैक्टस, पेंटिंग, टेरारियम, शहद, सब्जियां, हैंगिंग पॉट्स और हाइड्रोपोनिक तकनीकी जैसे विषयों पर कुल 15 मुख्य प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें 165 पुरस्कार 9 मार्च को वितरित किए जाएंगे।
AI तकनीक से होगी आगंतुकों की गणना
इस बार वसंतोत्सव में AI आधारित एप्लिकेशन के जरिए आगंतुकों की गणना की जाएगी। आईटीडीए ने इस बार आगंतुक फीडबैक के लिए भी खास सॉफ्टवेयर तैयार किया है। वहीं, लिलियम की एक नई उपश्रेणी नॉन-ट्रेडिशनल एरिया के तहत जोड़ी गई है।
देशभर के बागवानी विशेषज्ञ भी लेंगे भाग
दिल्ली के डीडीए, एनडीएमसी, राष्ट्रपति भवन (अमृत उद्यान), तेलंगाना के पब्लिक गार्डन, और अन्य राज्यों के उद्यान विभागों के अधिकारी भी इसमें भाग लेंगे। जीबी पंत विश्वविद्यालय और सगंध पौध केंद्र के शोध स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र होंगे।
आगंतुकों के लिए समय
• 7 मार्च : दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक
• 8 व 9 मार्च : सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक
• प्रवेश निशुल्क रहेगा
अन्य आकर्षण
• योग प्रतियोगिता के राष्ट्रीय विजेताओं को किया जाएगा सम्मानित
• ITBP, IMA, PAC और होमगार्ड्स के बैंड करेंगे विशेष प्रस्तुतियां
• 35 विभागों की सहभागिता तय
राजभवन में होने वाला यह आयोजन न सिर्फ फूलों की सुंदरता का उत्सव है, बल्कि यह राज्य की जैव विविधता, महिलाओं के सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा देने वाला मंच बन चुका है। राज्य के नागरिकों को आमंत्रित किया गया है कि वे इस तीन दिवसीय उत्सव में सहभागी बनें और प्रकृति के इस रंगीन उत्सव का आनंद लें।