मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क को लेकर उत्तराखंड में व्यापारियों का विरोध तेज होता जा रहा है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी है, लेकिन उससे पहले ही कई कारोबारियों ने यूपीआई भुगतान से दूरी और नकद लेन-देन को प्राथमिकता दी जा रही है।
शहर के कई दुकानों के बाहर केवल कैश में भुगतान की तख्तियां लगाई गई हैं, छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े व्यापारी तक इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।
15 अक्टूबर से यूपीआई के जरिए 2000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर कारोबारियों को 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क देना होगा। सरकार का कहना है कि इसका असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा और पर्सन टू पर्सन ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
इसके बावजूद व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई को लागू हुए करीब एक दशक हो चुका है और अचानक शुल्क लागू करना उनके लिए आर्थिक बोझ साबित होगा। इससे उन्हें दोबारा कैश व्यवस्था की ओर लौटना पड़ सकता है।