उत्तराखंड में पहली बार झरनों और गाड़-गदेरों का व्यापक सर्वे किया जा रहा है। इसका उद्देश्य राज्य के सभी प्राकृतिक जलस्रोतों की वास्तविक संख्या, स्थिति और उपयोगिता का रिकॉर्ड तैयार करना है। अब तक 13 जिलों में करीब 48 हजार जलस्रोतों का डाटाबेस बनाया जा चुका है और सर्वे अगले एक महीने में पूरा होने की उम्मीद है।
लघु सिंचाई विभाग के अनुसार, यह अभियान केंद्र सरकार की राष्ट्रीय जलस्रोत गणना का हिस्सा है। सर्वे में प्रत्येक जलस्रोत की जियो-टैगिंग की जा रही है, जिससे उसकी लोकेशन, जल प्रवाह और वर्तमान स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सके। वन क्षेत्रों के जलस्रोत इस सर्वे में शामिल नहीं हैं।
सर्वे के आधार पर सूख रहे और संकटग्रस्त जलस्रोतों की पहचान कर उनके संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जाएगा। अब तक 155 सूखते जलस्रोतों को उपचार के लिए चिन्हित किया गया है। साथ ही पुराने झरनों, धारों के पुनर्जीवन और भूजल रिचार्ज के लिए 21 रिचार्ज शाफ्ट भी बनाए गए हैं।