देहरादून शहर में स्थापित किए गए 13 लॉन्ग रेंज आधुनिक सायरनों का शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकार्पण किया। लोकार्पण के दौरान दावा किया गया कि 40 सेकेंड तक बजने वाले इन सायरनों की गूंज शहर के अलग-अलग हिस्सों में सुनाई देगी, जिससे आपदा के समय त्वरित सतर्कता संभव होगी।
आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
थाना डालनवाला परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड एक आपदा संभावित राज्य है, जहां समय रहते चेतावनी और सूचना प्रसारण अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि 8 और 16 किलोमीटर की रेंज वाले ये लॉन्ग रेंज सायरन प्राकृतिक आपदाओं—भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़ और भूकंप—के दौरान चेतावनी देने के साथ-साथ नागरिक सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
सीएम धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सायरन सिस्टम का नियमित परीक्षण किया जाए, साथ ही आम जनता को इसकी जानकारी और उपयोगिता से अवगत कराया जाए ताकि आपात स्थिति में इसका अधिकतम लाभ मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्त पुलिस कार्मिकों, उत्तराखंड पीसीएस एसोसिएशन और उत्तराखंड पुलिस अधिकारियों ने सीएम आपदा राहत कोष में सहायता राशि भी भेंट की। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, विधायक खजान दास और जिलाधिकारी सविन बंसल सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
सायरन तेज था, लेकिन कई जगह पहुंच नहीं सकी आवाज
सीएम द्वारा किए गए लोकार्पण के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में सायरन के प्रभाव का परीक्षण किया गया। हालांकि इसे लॉन्ग रेंज सायरन कहा गया, लेकिन वास्तविक परीक्षण में शहर के कई प्रमुख स्थानों पर इसकी आवाज सुनाई नहीं दी। भीड़भाड़ और ट्रैफिक शोर के कारण यहां सायरन की आवाज बिल्कुल भी सुनाई नहीं दी। घंटाघर और आसपास के बाजार में लोग सामान्य गतिविधियों में लगे रहे। देहरादून के मुख्य बस अड्डे तक भी सायरन की आवाज नहीं पहुंच सकी। हजारों लोगों की उपस्थिति के बावजूद किसी ने सायरन की ध्वनि महसूस नहीं की। पटेलनगर थाने से कुछ सौ मीटर दूर जाते ही सायरन की आवाज दब गई। लालपुल और देहराखास इलाके में भी आवाज नहीं पहुंची।
सर्वे चौक, नेहरू कॉलोनी, सहारनपुर चौक पर शाम के समय भीड़ और शोर के बीच सायरन की आवाज एक बार भी नहीं सुनाई दी।
निष्कर्ष
हालांकि राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक लॉन्ग रेंज सायरनों की स्थापना की है, लेकिन शुरुआती परीक्षण में इसके प्रभाव को लेकर सवाल सामने आए हैं। शहर के कई महत्वपूर्ण और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों तक इसकी आवाज नहीं पहुंच सकी, जिससे सिस्टम की वास्तविक रेंज और कार्यक्षमता की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।