अपनी उन्नति और विकास के लिए एकजुट होकर कार्य करे नामदेव समाज :डा. नारायण गणपतराव पाथरकर

श्रीनामदेव मंदिर भगवानपुर का 130 वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया गया 

भगवानपुर (हरिद्वार )। अखिल भारतीय नामदेव क्षत्रिय महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. नारायण गणपतराव पाथरकर ने कहा है कि नामदेव समाज को अपनी उन्नति और समाज के विकास के लिए एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। डा. पाथरकर मंगलवार को भगवानपुर (हरिद्वार) में श्री नामदेव समाज द्वारा आयोजित संत शिरोमणि नामदेव महाराज मंदिर के 130वें वार्षिक समारोह में बतौर कार्यक्रम अध्यक्ष अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नामदेव समाज बुद्धिमान लोगों का समाज है जिसमें प्रतिभाओं की कमी नहीं है। आवश्यकता सिर्फ एकजुट होकर समाज के लिए कार्य करने की है। समारोह में समाज के प्रतिभावान छात्र – छात्राओं को सम्मानित भी किया गया।

समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि नामदेव समाज कुरूक्षेत्र के दलजीत सिंह खुरपा ने लोगों से समाज के कार्यक्रमों में बढ़चढ़ हिस्सा लेने और समाज के लिए समय का दान करने का आग्रह किया।

उत्तम सिंह ने समाज में शिक्षा को अधिक बढावा देने और बच्चों को संस्कारित बनाने पर बल दिया। वेदप्रकाश ने समाज के लोगों से अधिक समन्वय बनाकर आगे बढने को कहा। उन्होंने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने के लिए भी कहा।

विशिष्ट अतिथि सुरेश जी नकुड ने भी समाज में शिक्षा पर अधिक ध्यान देने आवश्यकता बताई और कहा कि हमारे समाज से हर जिले में कम से कम एक आईएएस, आईपीएस अवश्य होना चाहिए।

कमल नामदेव ने समाज में बालक और बालिकाओं में शिक्षा के अन्तर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में समाज की बालिकाएं उच्च शिक्षा लेकर आगे बढ रही है लेकिन बालक इसमें पीछे है। उन्होंने कहा कि इससे विवाह जैसे संबंधों को करने में परेशानी आ रही है। उन्होंने समाज के लोगों से बालकों को भी उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

इन्होंने भी विचार प्रकट किए –

समारोह में नामदेव धर्मशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेंद्र वर्मा, चन्द्रलेखा, भगवानपुर नगर पंचायत चेयरमैन सुबोध राकेश, भाजपा ओबीसी मोर्चा उत्तराखंड के उपाध्यक्ष नरेश धीमान, प्रवीन नामदेव आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

सम्मान

समारोह में अतिथिगणों ने श्री नामदेव मंदिर समिति की ओर से समाज के प्रतिभावान छात्र – छात्राओं हाईस्कूल सीबीएसई बोर्ड में 92 प्रतिशत अंक लाने वाली श्रुति मोहन, हाईस्कूल यूपी बोर्ड में 72.5 प्रतिशत अंक लाने वाले हर्षित वर्मा, बीएएमएस ए1ग्रेड कार्तिक वर्मा तथा हाईस्कूल सीबीएसई बोर्ड में 93.2 प्रतिशत अंक लाने वाली वंशिका टांक को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया।

मंदिर समिति पदाधिकारियों ने समारोह में भोजन आदि और छप्पन भोग की व्यवस्था करने वाले देहरादून के राजकिशोर नामदेव, उनकी पत्नी रानी नामदेव को भी परिवार सहित सम्मानित किया।

समारोह में आए हुए श्रद्धालुओं को लड्डू प्रसाद देहरादून भाजपा ओबीसी मोर्चा के महानगर अध्यक्ष अनिल बेदी की ओर से वितरित किया गया।

ललितपुर से आए नामदेव समाज के राकेश जी ने मंदिर समिति भगवानपुर के पदाधिकारियों को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।

हवन-कीर्तन

इससे पहले आज प्रातः मंदिर प्रांगण में विधि विधान से हवन कीर्तन के साथ वार्षिकोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर भगवान विटठल और देवी रूकमणि को छप्पन भोग लगाया गया। रात्रि में संत नामदेव जी महाराज का गुणगान किया गया।

ये उपस्थित रहे

समारोह में नामदेव धर्मशाला ट्रस्ट हरिद्वार के ट्रस्टी लक्ष्मीचंद बेदी, संत नामदेव मंदिर समिति कपूरगढ़ के अध्यक्ष पवन नामदेव,अजय वर्मा, भाजपा ओबीसी मोर्चा महानगर देहरादून के अध्यक्ष अनिल बेदी, कोषाध्यक्ष संदीप नामदेव, पूरण, मन्नूलाल, रामकुमार, प्रदीप रोहिला, अनिल रोहिला, राजेश वर्मा, सुभाष, रवि नामदेव, राजकिशोर नामदेव, देवपाल नामदेव, धन प्रकाश नामदेव, चन्द्र पाल नामदेव सहित नामदेव समाज के विभिन्न स्थानों से आए सैंकडों लोग उपस्थित रहे। अन्त में संत शिरोमणि नामदेव महाराज मंदिर पर ध्वजारोहण और आरती से समारोह का समापन हुआ। समारोह का सराहनीय संचालन श्री नामदेव समाज भगवानपुर के कर्मठ कार्यकर्ता सुनील नामदेव ने किया।

संत श्री शिरोमणि नामदेव महाराज के बारे में – 

(संत शिरोमणि नामदेव महाराज का जीवन परिचय बेहद विस्तृत है लेकिन यहां हम उनके बारे में प्राप्त बहुत संक्षिप्त जानकारी अपने पाठकों के लिए दे रहे हैं। आशा करते हैं पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकेगी।)

जन्म : 26 अक्टूबर 1270, निधन :3 जुलाई 1350

अपने समय के सुप्रसिद्ध संत नामदेव का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के नरसी बामणी गांव में 26 अक्टूबर 1270 कार्तिक शुक्ल एकादशी वाले दिन संवत 1337 में हुआ। वह भगवान विटठल पंढरपुर के भक्त थे।

संत नामदेव का पूरा नाम नामदेव दामाजी रेलेकर था।शिम्पी (छिंपी) मराठा परिवार में जन्मे संत नामदेव के पिता दामा शेठ और मां गोणाई (गोणाबाई ) थी।

उनका विवाह कल्याण की राजाई (राजाबाई) के साथ हुआ। उनके चार पुत्र और पुत्रवधु थीं। इनमें नारायण – लाडा बाई, विट्ठल – गोडाबाई, महादेव – येसाबाई, और गोविंद – साखराबाई थीं। एक पुत्री लिम्बाबाई थी। बड़ी बहन आऊबाई और पौत्र का नाम मुकुन्द था। उनकी दासी संत जनाबाई थी जो उनके जन्म से पहले पिता के घर- घर रहती थी।

 

 

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