
एसके विरमानी / ऋषिकेश। ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज की परम शिष्या ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर साध्वी रामप्रिया( रामायणी) माता की प्रथम पुण्यतिथि श्रद्धांजलि समारोह के पावन अवसर श्री स्वामी सच्चिदानंद आश्रम शीशम झाड़ी में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती ने की। हरिद्वार ऋषिकेश के महामंडलेश्वर श्री महंत सभी संत, महात्मा श्रद्धांजलि समारोह में उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन संत शिरोमणि महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतना नन्द महाराज ने किया।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी आनंद चेतन सरस्वती महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी भगवत स्वरूप महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी प्रभोधानन्द महाराज, महामंडलेश्वर प्रेमानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी दयाराम दास महाराज, महंत महिमा नंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी बिंद्राबन दास महाराज, तुलसी मानस मंदिर के महंत रवि प्रपन्नाचार्य , स्वामी राम स्वरूप महाराज महंत विनय सारस्वत स्वामी केशवानंद स्वामी धर्मानंद आदि संत महामंडलेश्वर श्री महंत उपस्थित थे।

श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे चंद्रवीर पोखरियाल, नगर पालिका पूर्व अध्यक्ष शिवमूर्ति कंडवाल, रवि मंगला दुर्गा पंडित विकास गोयका सत्यनारायण गोयका सुधा गोयका बबली यादव चमनलाल विकास गोयल नत्थू यादव पंकज मंगला कैलाश रानी मंगला ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर श्री स्वामी सच्चिदानंद आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चेतन स्वरूप (राम) जी ने बताया कि ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर साध्वी रामप्रिया(रामायणी) माता जी ने अपना पूर्ण जीवन सद्गुरु सेवा में समर्पित किया हुआ था। राम प्रिया माता जी सेवा भाव समर्पण की मूर्ति थी। उन्होंने गुरु की आज्ञा को ही सर्वोपरि माना। माताजी को रामायण कंठस्थ याद थी। उन्होंने सदैव गुरु सेवा में ही अपना जीवन समर्पित करते हुए गुरु परंपरा को सदैव आगे बढ़ाएं। उनके द्वारा पूरे विश्व में उनके साधु को के द्वारा गुरु परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है उसी गुरु परंपरा को उनके शिष्य वर्तमान परमाध्यक्ष स्वामी चेतन स्वरूप (राम) जी निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य की इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए माता राम प्रिया जी को यही सच्ची श्रद्धांजलि है
इसी अवसर पर आए हुए सभी महामंडलेश्वर ने माता जी को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए अपने उनके साथ अपने अनुभवों को साझा किया।