केंद्र सरकार आज लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 पेश करने जा रही है। यह विधेयक पहले अगस्त 2024 में पेश किया गया था, लेकिन इसके बाद इसे सर्वसम्मति से संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया था। जेपीसी ने विधेयक पर छह महीने तक विचार किया और अंततः 27 जनवरी 2025 को इसे फिर से संसद में पेश करने की मंजूरी दी। एक महीने बाद, केंद्रीय कैबिनेट ने भी इस विधेयक पर मुहर लगा दी है।
वक्फ कानून, 1995 में संशोधन का उद्देश्य:
सरकार इस संशोधन के माध्यम से वक्फ कानून, 1995 में बदलाव चाहती है, जिसका मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को बेहतर बनाना और संबंधित विवादों को शीघ्र सुलझाना है। इस संशोधन से वक्फ संपत्तियों के मामलों में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है और वक्फ बोर्ड के कामकाज में भी सुधार होगा।
जेपीसी में क्या हुआ?
विधेयक को जेपीसी में भेजे जाने के बाद 572 संशोधन प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें से 14 संशोधनों को बहुमत से मंजूरी मिली। विपक्षी दलों ने कई संशोधनों का विरोध किया, लेकिन उन्हें बहुमत से खारिज कर दिया गया।
जेपीसी की सदस्य और भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने बताया कि विधेयक पर पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चर्चा की गई और समिति ने 284 हितधारकों से भी बातचीत की। इसके बाद 29 जनवरी को यह विधेयक 15-11 के अंतर से जेपीसी द्वारा अनुमोदित किया गया और लोकसभा स्पीकर को रिपोर्ट सौंप दी गई।
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी:
जेपीसी की बैठकों के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी देखी गई। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि जेपीसी अध्यक्ष अपनी मनमानी कर रहे थे और कुछ सांसदों को बैठक से निलंबित भी किया गया। विपक्षी दलों का दावा था कि यह विधेयक संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
विधेयक में किए गए महत्वपूर्ण बदलाव:
वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता: वक्फ संपत्तियों से संबंधित मामलों को पूर्वव्यापी तरीके से नहीं खोला जाएगा, जब तक कि वे विवादित न हों।
वक्फ बोर्ड में महिला और गैर-मुस्लिम सदस्य: अब वक्फ बोर्डों में कम से कम दो महिला और गैर-मुस्लिम सदस्य को नामित करने का प्रस्ताव है।
वक्फ विवादों में सरकारी अधिकारी की जांच: पहले जिला कलेक्टर को वक्फ विवादों में जांच की शक्ति दी गई थी, जिसे अब संशोधित किया गया है और राज्य सरकार को जांच करने का अधिकार दिया गया है।
वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण: सभी वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण केंद्रीय डाटाबेस में किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता, तो संबंधित वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण होने पर अदालत में जाने का अधिकार समाप्त हो जाएगा।
न्यायाधिकरण का निर्णय चुनौती योग्य: वक्फ न्यायाधिकरण के फैसले को अब उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकेगी।
विधेयक का उद्देश्य:
इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना, पारदर्शिता बढ़ाना और न्याय की प्रक्रिया को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि इस संशोधन से वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन होगा और वक्फ बोर्ड अधिक प्रभावी ढंग से काम करेगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया:
विपक्षी दलों का कहना है कि यह विधेयक मुसलमानों के धार्मिक मामलों में सरकार के हस्तक्षेप का अवसर देगा, जबकि सरकार इसे वक्फ संपत्तियों की देखरेख और लाभार्थियों की मदद के रूप में देखती है।
यह विधेयक अब संसद में पेश किया जाएगा और इसके सर्वसम्मति से पारित होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि विपक्ष द्वारा इस पर कड़ा विरोध जारी रहेगा।