महान रोहिला योद्धा महाराजा रणवीर सिंह

 

आज बलिदान दिवस पर विशेष 

रोहिला राजपूतों के पूर्वज और गुलाम वंश के दौरान दिल्ली की गद्दी पर बैठे सुल्तानों से टक्कर लेने वाले महाराजा रणवीर सिंह रोहिला का आज 770 वां बलिदान दिवस है। रक्षाबंधन के दिन 1254 ई में नसीरुद्दीन चंगेज ने धोखे से इस महान रोहिला योद्धा की हत्या कर दी थी।

आपको बता दें कि उप्र के सुप्रसिद्ध नगर रामपुर (रामपुर स्टेट ) की स्थापना करने वाले प्राचीन रोहिलखंड रियासत के राजा राम के वंश में राजा त्रिलोक सिंह के रणवीर सिंह का जन्म  25 अक्टूबर, 1204 तदानुसार तत्कालीन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की प्रथमा तिथि को हुआ। रघु वंश में सूर्य वंश रघु के वंशधर निकुम्भ ई●पू● 326 वर्ष कठगण राज्य (रावी नदी के काठे में) सिकन्दर का आक्रमण काल-राजधानी सांकल दुर्ग (वर्तमान स्यालकोट) 53 वीं पीढ़ी राज्य अजयराव के वंशधर निकुम्भ वंशी राजस्थान अलवर, मंगल गढ़ जैसलमेर होते हुए गुजरातसौराष्ट्र कठियावाड , फिर पांचाल, मध्यदेश गये।

अलवर में दुर्ग निकुम्भ वंशी (कठ क्षत्रिय रावी नदी के काठे से विस्थापित कठ-ंगण) क्षत्रियों ने बनवाया (राज्य मंगल गढ़), सौराष्ट्र में काठियावाड़ की स्थापना की ।

मध्यदेश के पांचाल में कठेहर रोहिलखंड राज्य की स्थापना (कन्नौज के पतन के पश्चात्) की। यहां अहिक्षेत्र के पास रामनगर गांव मे राजधानी स्थापित की, ऊंचा गांव मझगांवा को सैनिक छावनी बनाया। यहां पर शासक हंसदेव, रहे। इनके पुत्र हंसबेध राजा बने- जिन्होंने 816 ई. तक राज्य किया ।

इसी वंश में राजा रामशाही (राम सिंह ) ने रामपुर गांव को एक नगर का रूप दिया और 909 ई में कठेहर- रोहिलखण्ड प्रान्त की राजधानी रामपुर में स्थापित की। यहां पर कठ क्षत्रियों ने 11 पीढ़ी तक शासन किया। इसी वंश में महापराक्रमी, विधर्मी संहारक राजा रणवीरसिंह रोहिला का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की प्रथमा तिथि तदानुसार 25 अक्टूबर 1204ईसवी को राजपूत काल के एसे समय में हुआ।

बताते है कि जब महराजा पृृथ्वी राज चौहान के अंत के कारण समस्त राजपूत शक्ति क्षीण हो चुकी थी और मुस्लिम आक्रांता अपनी सल्तनत कायम करने में लगे थे। बची हुई राजपूत शक्तियों का बहुत कठोरता ओर बर्बरता से दमन करने में लगे थे हिंदुआ सूर्य चौहान अस्त हो चुका था ।

इक्कीस वर्ष की आयु में रामपुर के राजा त्रिलोक चंद उर्फ त्रिलोक सिंह के पुत्र रणवीर सिंह का विवाह विजयपुर सीकरी की राजकुमारी तारा देवी से हुआ। रणवीर सिंह रोहिला का राजतिलक भी इसी वर्ष इक्कीस वर्ष की आयु में हुआ यानी 1225,ईसवी में हुआ। इनकी लंबाई लगभग सात फीट थी, कंधो पर सीना कवच लगभग साठ शेर ,सिर पर कवच लोहे का इक्कीस सेर खड़ग का वजन 25, सेर ओर स्वयं उनका वजन 125 सेर था।

दिल्ली सुल्तान के गुलाम सेनापति नासिरूद्दीन बहराम, चंगेज उर्फ नासिरूद्दीन महमूद ने , सन् 1253 ई0,में दोआब, कठेहर, शिवालिक पंजाब, बिजनौर आदि क्षेत्रों पर विजय पाने के लिए दमनकारी अभियान चलाया । इतने अत्याचार , मारकाट तबाही मचाई कि विद्रोह करने वाले स्थानीय शासक, बच्चे व स्त्रियां भी सुरक्षित नहीं रही। ऐसी विषम परिस्थितियों में रोहिलखण्ड के रोहिला शासकों ने दिल्ली सल्तनत के सूबेदार‘ ताजुल मुल्क इज्जूददीन डोमिशी को मार डाला। दिल्ली सल्तनत के लिये यह घटना भीषण चुनौती समझी गई। इस समय रामपुर के राजा रणवीर सिंह थे । उन्होनें आस पास की समस्त राजपूत शक्तियों को एकता के सूत्र में बांधा ओर दिल्ली सल्तनत के विरूद्ध अपनी क्रान्तिकारी प्रवृत्ति को सजीव बनाये रखा जिससे दिल्ली सुल्तान कठेहर रोहिलखंड पर आक्रमण करते हुए भय खाते थे नासिरूद्दीन महमूद (चंगेज) इस घटना से उद्वेलित हो उठा और सहारनपुर ‘ उशीनर प्रदेश‘ के मण्डावार व मायापुर से 1253 ई0 में गंगापार कर गया। विद्रोह को दबाता हुआ, रोहिलखण्ड को रौदता हुआ बदांयू पहुंचा। वहां उसे ज्ञात हुआ कि रामपुर में राजा रणवीर सिंह के साथ लोहे के कवचधारी 84 रोहिले है जिनसे विजय पाना टेढ़ी खीर है। इसकीी सूचना दिल्ली भेजी गई। दिल्ली दरबार में सन्नाटा हो गया कि एक छोटे राज्य कठेहरखण्ड के रोहिलों से कैसे छीना जाए। नासिरूद्दीन चंगेज (महमूद) ने तलवार व बीड़ा उठाकर राजा रणवीर सिंह रोहिला के साथ युद्ध करने की घोषणा की। रामपुर व पीलीभीत के बीच मैदान में नसीरुद्दीन व कठेहर नरेश सूर्य वंशी क्षत्रिय रणवीर सिंह की सेना के बीच भयंकर युद्ध हुआ, 6000 रोहिला राजपूत व  84 लोहे के कवचधारी रन्धेलवंशी सेना नायकों की सेना के सामने नासिरूद्दीन की तीस हजारी सेना के पैर उखड़ गये।

नासिरूद्दीन चंगेज को बन्दी बना लिया गया। बची हुई सेना के हाथी व घोडे तथा एक लाख रूपये महाराज रणवीर सिंह को देने की प्रार्थना पर आगे ऐसा अत्याचार न करने की शपथ लेकर नासिरूद्दीन महमूद ने प्राण दान मांग लिया। क्षात्र धर्म के अनुसार शरणागत को अभयदान देकर राजा रणवीर सिंह ने उसे छोड़ दिया परन्तु धोखेबाज महमूद जो राजा रणवीर सिंह पर विजय पाने का बीड़ा उठाकर दिल्ली से आया था, षडयंत्रों में लग गया।

कहा जाता हैं कि उस समय राजा रणवीर सिंह का एक दरबारी पं. गोकुलराम पाण्डेय था। उसे रामपुर का राजा नियुक्त करने का लालच देकर महमूद ने विश्वास में ले लिया और रामपुर के किले का भेद लेता रहा। पं. गोकुल राम ने लालच के वशीभूत होकर विधर्मी को बता दिया कि रक्षांबधन के दिन सभी राजपूत निःशस्त्र होकर शिव मन्दिर में शस्त्र पूजा करेंगें। यह शिव मन्दिर किले के दक्षिण द्वार के समीप है , यह सुनकर महमूद का चेहरा खिल उठा और दिल्ली से भारी सेना को मंगाकर जमावड़ा प्रारम्भ कर दिया रक्षाबन्धन का दिन आ गया। किले में उपस्थित सभी सैनिक, सेनाायक अपने-ंअपने शस्त्रों को उतार कर पूजा स्थान पर शिव मन्दिर ले जा रहे थे। गोकुल राम पाण्डेय यह सब सूचना विधर्मी तक पहुंचाता रहा। श्वेत ध्वज सामने रखकर दक्षिण द्वार पर पठानों की गुलामवंशी सेना एकत्र हो गयी। पूजा में तल्लीन राज पुत्रों को पाकर गोकुलराम पाण्डेय ने द्वार खोल दिया।

सहारनपुर में महाराज रणवीर सिंह रोहिला समारक

शिव उपासना में लीन सभी को घेरे में ले लिया गया। इससे समस्त राजपूत भौचक्के रह गए और मन्दिर से तुलसी का पत्ता लिया ओर मुंह में दबा कर शाका बोल दिया। घमासान युद्ध छिड़ गया। राजा रणवीर सिंह ने निशस्त्र लड़ते हुए अदम्य साहस ओर शौर्य का परिचय दिया और महमूद के सैनिकों से भिड़ गए। रणवीर सिंह चारों ओर से विधर्मी सैनिकों से घिरे युद्ध कर रहे थे।  विधर्मी की खड़ग छीन ली ओर आक्रांताओं के शीश कट कट गिरने लगे , उस समय रामपुर के किले में केवल तीन हजार राजपूत ही उपस्थित थे। वे भी निहत्थे रह गए थे सभी राजपूत बड़ी वीरता से लडे किन्तु संख्या में कम होने के कारण बिखर गए, रणवीर सिंह रोहिला की पीठ पर विधर्मी सेना ने तलवार से वार करके काट डाला लेकिन  अंतिम बूंद रक्त की रहने तक रणवीर धराशायी नहीं हुए यह देख कर नसीरुद्दीन चकित रह गया। देखते ही देखते कठेहर नरेश वीरगति को प्राप्त हुए। नासिरूद्दीन ने पं. गोकुल राम से कहा कि जिसका नमक खाया अब तुम उसी के नहीं हुए तो तुम्हारा भी संहार अनिवार्य है ,नमक हराम को जीने का हक नहीं है। गोकुल का धड़ भी सिर से अलग पड़ा था। सभी स्त्री बच्चों को लेकर रणवीर सिंह का भाई सूरत सिंह उर्फ सुजान सिंह किले से पलायन कर गया महारानी तारादेवी जो विजय पुर सीकरी के राजा की पुत्री थी राजा रणवीर सिंह के साथ सती हो गई।

रामपुर में किले के खण्डहरात, सती तारादेवी का मन्दिर तथा उनका राजमहल अभी तक एक ध्वस्त टीले के रूप में मौजूद है, जो क्षात्र धर्म का परिचायक व रामपुर में रोहिला क्षत्रियों की कठ-शाखा के शासन काल की याद ताजा करता है जिन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान कर क्षात्र धर्म की रक्षा की।

उनकी पावन स्मृति को जीवित रखने व रोहिलखंड राजपुताना की वीर गाथा को सजीव बनाए रखने के लिए भारत का समस्त रोहिला क्षत्रिय राजपूत समाज रक्षा बन्धन को शौर्य दिवस तथा 25 अक्टूबर को प्रतिवर्ष स्वाभिमान दिवस के रूप में मनाता है शस्त्र पूजा करता है। उत्तर भारत के महानगर बड़ौत में राजा रणवीर सिंह रोहिला मार्ग व ऐतिहासिक नगर सहारनपुर में आज महाराजा रणवीर सिंह रोहिला चौक (जेल चुंगी ) स्थित  है। यही पर प्राचीन रोहिला किला (जिला कारागार ) भी मौजूद है। जिसे पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन लिया है ऐसे महान रोहिला योद्धा भारतनमन की ओर से शत – शत नमन ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!