कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रचंड बहुमत से जीत गयी और अब उसका जोश बढ़ा हुआ है लेकिन भाजपा के लिए यह हार बेहद पीड़ा देने वाली है। इसलिए कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार उस भाजपा के हाथ से सत्ता छीनी है जो 2014 से ही कांग्रेस मुक्त भारत की चर्चा करती रही है। कांग्रेस ने कर्नाटक से पहले हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव जीता। लेकिन कर्नाटक भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य था। दक्षिण में कर्नाटक ही वह पहला राज्य रहा जहां भाजपा मजबूत स्थिति में थी। शायद यही वजह रही कि इस चुनाव में भाजपा ने कोई कमी नहीं छोडी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले गृहमंत्री अमित शाह ने वहां ताबड़तोड़ रैली और रोड शो किए। यह अलग बात है कि इस बार कोई मैजिक नहीं चला जबकि कांग्रेस के उठाए मुद्दे कामयाब हो गए। कांग्रेस इस बार बेहद बडे अन्तर से जीतकर आयी। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कांग्रेस 224 विधानसभा सीटों में से 136 पर थी जबकि पिछली बार की सत्ताधारी भाजपा सिर्फ 64 सीटों पर ही सिमटती दिखी।
क्षेत्रवार चर्चा करें तो पाते है कि कांग्रेस ने कर्नाटक के हर इलाके में बेहतरीन प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र कर्नाटक, पुराना मैसूर, हैदराबाद कर्नाटक, मध्य कर्नाटक में कांग्रेस ने शानदार उपस्थिति दर्ज की जबकि तटीय इलाके करावल और बैंगलोर शहर में ही अच्छा कर सकी। सवाल यह है कि आखिर फ्रंटफुट पर खेल रही भाजपा के साथ ऐसा क्या हुआ कि इस बार वह कर्नाटक में सत्ता से बाहर हो गयी। हम सभी यही मान और कह रहे है कि कांग्रेस ने भाजपा को हरा दिया। कांग्रेस ने भाजपा का सूपडा साफ कर दिया लेकिन बात सिर्फ इतनी भर रही है बल्कि अगर यह कहा जाए कि कर्नाटक में भाजपा को भाजपा ने ही हराया तो ज्यादा ठीक रहेगा। वास्तविकता यही है कर्नाटक भाजपा में चुनाव से पहले ही हार की स्थिति बनी हुई थी। आंतरिक कलह भी थी और उसी वजह से भाजपा के कई लोकप्रिय नेता उसे छोडकर कांग्रेस में शामिल हो गए। हालांकि उनमें से कई को इसका नुकसान भी और पार्टी से बगावत भारी पड़ी। भाजपा के प्रमुख नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार ऐसे ही नेता है। कांग्रेस का दामन थामने का उन्हें फायदा नहीं हुआ। वे खुद चुनाव हार गए लेकिन वे भाजपा में बने रहते तो शायद उनकी स्थिति अच्छी रहती। कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने पार्टी तो नहीं छोडी लेकिन शायद मन से काम भी नहीं किया। इसका अनुमान कर्नाटक में भाजपा के सबसे दमदार नेता माने जाने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के क्षेत्र शिमोगा में पार्टी की खराब स्थिति को देखकर लगाया जा सकता है। कहीं न कही येदियुरप्पा अपनी पार्टी से नाराज दिखे तो नतीजा सबके सामने है। हालांकि अब वे कह रहे है कि हार जीत कोई बडी बात नहीं है और चिंतन किया जाएगा कि कहां कमी रही। पिछली सरकार के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई का भी कुछ ऐसा ही विचार है। बहरहाल कहते हैं जो जीता वही सिकंदर और कर्नाटक में इस बार कांग्रेस और उसके अध्यक्ष मल्ललिकार्जुन खडगे ही सिकंदर कहलाए जाएंगे। 2024 से पहले यह जीत कांग्रेस और उसके नेेताओं को उत्साह भी देगी। इसलिए भी इस चुनाव में कांग्रेस के नेताओं मल्लिकार्जुन खडगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और खुद सोनिया गांधी ने एक टीम की तरह काम किया। बेहतर प्रबंधन उसे कामयाब बना गया। अब सवाल यह है कि 2024 के चुनाव में भी यह प्रबंधन कमाल दिखा पाएगा? देखा जाए तो अभी इसका कयास लगाना जल्दबाजी होगी। इसलिए भी कि लोकसभा चुनाव से पहले अभी तेलंगाना, राजस्थान, मप्र और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होना है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में तो कांग्रेस ही सरकार है जबकि मप्र में भाजपा सत्तारूढ़ है। तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्रवादी समिति के के चन्द्रशेखर राव मुख्यमंत्री है। अब देखना यह है कि कांग्रेस पार्टी राजस्थान और छत्तीसगढ़ में फिर से वापसी करती है और मप्र में शिवराज सिंह चौहान को सरकार से बाहर कर पाती है या नहीं है। तेलंगाना में भी उसके प्रदर्शन पर नजर रहेगी। अगर कांग्रेस इन राज्यों में बेहतर करने में कामयाब हो जाती है तो फिर यह माना जाएगा कि 2024 में मुकाबला बेहद कांटे का होगा लेकिन ऐसा नहीं होता तो फिर 2024 में भी कांग्रेस की राह आसान नहीं है। भाजपा कर्नाटक चुनाव हार गयी है लेकिन उसने हार मानी नही है। 2024 को लेकर भाजपा पूरी तरह सजग है और उसका काम जारी है। सबसे बडे राज्य उप्र में तो भाजपा की लोकप्रियता कायम है। निकाय चुनाव के परिणाम: इसका संकेत दे रहे है। आने वाले विधानसभा चुनावों में भी भाजपा निश्चित ही और फूंक – फूंक कर और सधे हुए कदम बढ़ाएगी। वह कर्नाटक में हुई गलतियों, खामियों से सबक लेगी इसलिए अभी कांग्रेस को इस जीत से फूलकर कुप्पा हो जाने के बजाय भाजपा से मुकाबले के लिए और अधिक बेहतर रणनीति बनानी होगी।