बिछ गयी 2024 के लिए जंग की बिसात

राहुल गांधी : सांसद से पूर्व सांसद

*नरेश रोहिला

लोकसभा चुनाव में भले ही अभी एक साल से अधिक का समय बचा हो लेकिन इसकी जंग के लिए चक्रव्यूह की रचना हो चुकी है। बानगी कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता को रद्द किए जाने फैसले में दिख रही है। दरअसल सूरत की एक अदालत ने एक दिन पहले ही 2019 में कर्नाटक में दिए गए एक बयान को लेकर मानहानि के मामले में कांग्रेस के सबसे बडे नेता राहुल गांधी को दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई है। हालांकि अदालत ने सजा के अमल पर 30 दिन के रोक भी लगाते हुए राहुल गांधी की बेल भी मंजूर की है लेकिन अदालत के फैसले से सत्तापक्ष को राहुल गांधी और कांग्रेस को एक बार फिर घेरने का मौका मिल गया। कल अदालत ने अपना फैसला दिया और आज लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी की सदस्यता रद्द कर दी। अब अगर राहुल गांधी को ऊपरी अदालत से कोई राहत नहीं मिलती तो उनके लिए 2024 के चुनाव एक उम्मीदवार बनना भी मुश्किल होो जाएगा। सदस्यता रद्द होने के तुरंत बाद ही कांग्रेस में हलचल बढ गयी। कांग्रेस का आम कार्यकर्ता सडकों पर उतर चुका है तो उसके तमाम बडे नेता दिल्ली पहुंचने लगे ताकि आगे की रणनीति बनायी जा सके। सदस्यता रद किए जाने के बाद दूसरे विपक्ष दल भी लामबंद होना शुरू हो गए। विपक्ष के वे नेता भी कांग्रेस और राहुल गांधी के समर्थन में दिखाई दे रहे है जो अभी तक दूरी बनाकर चल रहे थे। कांग्रेस सहित समूचा विपक्ष इस कदम को तानाशाही और लोकतंत्र की हत्या बता रहा है जबकि सत्तारूढ़ भाजपा कह रही है कि उसने कुछ नहीं किया। जो हुआ वह कानून और संविधान में दी गयी व्यवस्था के अनुसार हुआ। दरअसल संविधान में जनप्रतिनिधि कानून में ऐसी व्यवस्था है कि यदि किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि को किसी मामले में दो साल या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है तो उसकी सदन से सदस्यता समाप्त हो जाएगी बशर्ते सुप्रीम कोर्ट भी सजा को बरकरार रखे।

कांग्रेस इस मामले को लेकर अब राजनीतिक संघर्ष करने का ऐलान कर चुकी है साथ वह इसे लेकर न्यायिक लडाई भी लडेगी और जल्द ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खठखटाएगी। अदालत राहुल की सजा को लेकर क्या निर्णय देती है यह तो आने वाले दिनों में पता चलेगा लेकिन उनकी सदस्यता फिर भी बच पाएगी, यह कहना मुश्किल है। सदस्यता रद्द करने का फैसला लोकसभा स्पीकर द्वारा हुआ है और संभवत स्पीकर के फैसले को चुनौती नहीं दी सकती है। कांग्रेस की मुश्किल यह भी है कि राहुल गांधी का बतौर लोक सभा सदस्य के तौर पर बचा हुआ कार्यकाल तो खत्म हो ही गया समझो साथ ही 2024 के चुनाव में भी अगर वह खडे नहीं हो सकेंगे तो कांग्रेस करेगी क्या ? कांग्रेस में राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के लिए चेहरा है लेकिन जब पार्टी के खिवैया की नैया ही डांवाडोल होगी तो कांग्रेस  2024 से पहले जो लकीर खींचने की कोशिश कर रही है, वह लकीर खींचेगी कैसे? सवाल यह भी है कि खुद राहुल क्या करने वाले है। क्या वह अपनी सदस्यता बचाने ऊपरी अदालत जाएंगे और अगर अदालत से कोई राहत नहीं मिलती तो क्या वह जेल जाएंगे ? जो भी हो लेकिन एक बात साफ है कि चुनाव की बिसात पर महारथी उतर चुके है। कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाली भाजपा को यह लगता है कि राहुल गांधी को एक तरह से मैदान से बाहर करके उसने चुनावी चक्रव्यूह का पहला किला जीत लिया है तो कांग्रेस अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार पर और आक्रमण तरीके से हमला करने के मूड में दिख रही है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे साफतौर पर कह चुके हैं कि सरकार और भाजपा को अगर यह लगता है कि इससे अस्ल समस्या खत्म हो गयी तो ऐसा नहीं है। कांग्रेस अडानी के मामले में जेपीसी जांच की मांग को उठाती रहेगी और पूरे जोर यह लडाई लडेगी। आने वाले समय में यह मामला क्या रूप लेगा, कुछ भी नहीं कहा जा सकता लेकिन फिलहाल राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए यह बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।  इससे 2024 की चुनावी जंग भी बेहद रोचक हो गयी है।

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