जरूरत तो सिस्टम में खराबी को दूर करने की है, युवाओं पर लाठियां बरसाने की नहीं
नरेशरोहिला
आज देहरादून में बेरोजगार युवाओं और पुलिस के बीच जो घमासान हुआ। पुलिस ने लाठियां भांजी और युवाओं ने पुलिस बल पर पत्थर फेंके। उसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वर्तमान में अगर उत्तराखंड का शांत और शिक्षित युवा इस कद्र आक्रोशित है तो इसके लिए उनसे ज्यादा हमारा सिस्टम जिम्मेदार है। पिछले कई दिनों से बेरोजगार युवा इकट्ठा होकर देहरादून के गांधी पार्क के समक्ष धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में जिस तरह धांधली हो रही है और नकल हो रही है। उसकी सीबीआई जांच करायी जाए। सरकार भर्ती परीक्षाओं में धांधली की सीबीआई जांच कराए या अन्य किसी माध्यम से उच्च स्तरीय जांच लेकिन यह तो सत्य है कि जांच होनी चाहिए। वास्तव राज्य संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं और अन्य कई प्रतियोगी परीक्षाओं का क्या हाल हुआ है, उसे पूरा उत्तराखंड देख चुका है। हर परीक्षा में गडबडी सामने आ रही है और हर परीक्षा स्थगित की जा रही है। कई मामलों में तो कुछेक गिरफ्तारियां भी हुई लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो पाया। सवाल यह है कि आखिर सरकार ऐसा कोई सिस्टम क्यों नहीं बना पा रही जिससे पारदर्शिता के साथ भर्ती हो और प्रतियोगी परीक्षाएं नकलविहीन सम्पन्न हो सके। हर बार हर परीक्षा को स्थागित करने या रद्द करने से काम थोडी चलेगा। आखिर प्रदेश के उन हजारों युवाओं की क्या खता है जो हजारों रूपए खर्च कर कोचिंग आदि लेकर परीक्षा की तैयारी करते हैं। वह इसी उम्मीद परीक्षा देते हैं कि पास हो जाने पर उन्हें नौकरी मिल सकेगी लेकिन रिजल्ट की बारी आती है तो पता चलता है कि परीक्षा स्थगित हो गयी। कभी प्रश्नपत्र लीक हो जाते हैं तो कभी नकल कराना सामने आता है। ऐसे में युवाओं का पैसा ही नहीं बल्कि समय भी खराब हो रहा है। युवाओं की आयु निकल जाती है जिससे उन्हें फिर परीक्षा देने का ही मौका नहीं मिलता और उनके सपनों पर तुषारापात हो जाता है। वास्तव में प्रतियोगी परीक्षाओं को नकलविहीन और पारदर्शी तरीके से न करा पाना परीक्षा कराने वाली एजेंसी से ज्यादा सरकार की विफलता मानी जाएगी क्योंकि अन्तिम जिम्मेदारी तो सरकार की ही है । इस स्थिति से प्रदेश में परीक्षाओं को लेकर शुचिता का सवाल भी खडा हो रहा है। और ऐसे अगर प्रदेश का युवा आक्रोशित है तो उसे डंडे से नहीं बल्कि जिम्मेदार नीति नियंताओं को आगे आकर प्यार से समझाना चाहिए कि उनके साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन ऐसी कोशिश शायद नहीं की गयी अगर की गयी होती तो आज जो घटना घटी वह न घटती। जरूरत सिस्टम में आ गयी खराबी को ठीक करने की है युवाओं पर लाठियां चलाने की नहीं।
प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हालांकि यह संदेश दिया है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह से नकलविहिन और गड़बड़ी विहीन कराए जाने की व्यवस्था करेंगे और युवाओं के साथ कोई अन्याय नहीं होने देंगे। पर सचमुच अब सिर्फ आश्वासन से काम नहींं चलेगाा बल्कि प्रदेश के मुखिया को तुरंत ऐसे कदम उठाने होंगे जिसे युवाओं में भरोसा कायम हो सके। यह आवश्यक है कि जल्द से जल्द एक पारदर्शी व्ययवस्था बनाकर स्थगित परीक्षाओं को तुरंत कराया जाए और रिजल्ट घोषित किया जाए। आखिर बेरोजगार युवा कब तक इंतजार करेंगे।
