चमोली। टीएचडीसी की पीपलकोटी-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद लापता सभी श्रमिकों को निकाल लिया गया है। मंगलवार को लापता दो और मजदूरों के शव बरामद होने के साथ ही करीब 117 घंटे से चल रहा बचाव अभियान पूरा हो गया। हादसे में मृतकों की कुल संख्या 10 हो गई है।
यह हादसा 13 अगस्त की शाम करीब 6:30 बजे निर्माणाधीन टनल के अंदर लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर हुआ था। भारी भूस्खलन और पहाड़ी से पानी के रिसाव के कारण टनल में 22 श्रमिक फंस गए थे। घटना के तुरंत बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
अभियान के दौरान 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती कराया गया। वहीं, पहले दिन चार श्रमिकों के शव बरामद हुए। इसके बाद 14 अगस्त को तीन और 15 अगस्त को एक श्रमिक का शव मिला।
मंगलवार को सुबह एक और दोपहर में एक अन्य शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या 10 पहुंच गई।
117 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
टनल के भीतर भारी मात्रा में पानी और कीचड़ जमा होने के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। पानी और कीचड़ निकालने के लिए लगातार पंपों का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही रेस्क्यू टीमों ने अंदर फंसी मशीनों को भी बाहर निकाला और लगातार सर्च अभियान चलाया।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान विकट परिस्थितियों में बारी-बारी से टनल के अंदर जाकर लापता श्रमिकों की तलाश में जुटे रहे। जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने हादसे में कुल 10 लोगों की मौत की पुष्टि की है।
हाइड्रो प्रोजेक्ट पर उठे सवाल
हादसे के बाद उत्तराखंड क्रांति दल ने पहाड़ों में संचालित हाइड्रो प्रोजेक्ट को लेकर सवाल उठाए हैं। यूकेडी के केंद्रीय प्रवक्ता सत्य प्रकाश सती ने पहाड़ों में हाइड्रो प्रोजेक्ट को तत्काल बंद करने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी परियोजनाएं पहाड़ों को खोखला कर रही हैं और स्थानीय लोगों को इनसे लाभ के बजाय नुकसान उठाना पड़ रहा है।