उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत करीब 18 लाख मतदाताओं के प्रपत्रों में संभावित विसंगतियां सामने आई हैं। इन मामलों में सॉफ्टवेयर के जरिए पांच मानकों पर छंटनी की जा रही है। बड़ी विसंगति मिलने पर संबंधित मतदाता को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस भेजा जाएगा।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार, छोटी त्रुटियों को नजरअंदाज किया जाएगा, जबकि गंभीर विसंगतियों वाले मामलों में नोटिस जारी होगा। मतदाता को नोटिस का जवाब देने के लिए 7 से 10 दिन का समय मिलेगा और जवाब के साथ संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।
इन पांच मामलों में आ सकता है नोटिस
- नाम में अंतर: पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड में मतदाता या परिजन के नाम में अंतर।
- न्यूनतम आयु अंतर: माता-पिता और मतदाता की उम्र में 15 साल से कम का अंतर।
- अधिकतम आयु अंतर: माता-पिता और संतान के बीच 50 साल से अधिक का आयु अंतर।
- प्रोजनी की संख्या: एक मतदाता के साथ छह से अधिक संतानों की मैपिंग।
- पीढ़ीगत आयु अंतर: दादा-दादी या नाना-नानी और मतदाता के बीच 40 साल से कम का आयु अंतर।
हर 8-10 बूथ पर तैनात होगा AERO
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, हर 8 से 10 मतदान केंद्रों पर एक AERO तैनात किया जाएगा, जहां स्थानीय स्तर पर सुनवाई की व्यवस्था होगी।