
एसकेविरमानी/ ऋषिकेश। सद्गुरु सदाफल देव ब्रह्मविद्या विहंगम योग ऋषिकेश के संत समाज के तत्वावधान में वृहद स्वर्वेद शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से निकाली गई।
ऋषिकेश में शीशम झाड़ी स्थित विहंगम योग आश्रम में आज सुबह से ही संत समाज और ब्रह्मविद्या विहंगम योग के भक्तों द्वारा गाजे-बाजे के साथ ऋषिकेश मुनि की रेती में भव्य स्वर्वेद शोभायात्रा निकाली गई। ऋषिकेश शीशम झाड़ी में आश्रम से भारी संख्या में संतों और भक्तों ने सुबह आठ बजे स्वर्वेद का यात्रा का शुभारंभ किया।
यात्रा लक्ष्मण झूला मार्ग, हरिद्वार रोड, त्रिवेणी घाट, मुखर्जी मार्ग, लाजपत राय मार्ग, क्षेत्र रोड से भ्रमण करते हुए वापस चंद्रभागा पुल, चंद्रेश्वर नगर, शीशम झाड़ी के मुख्य मार्ग से होते हुए विहंगम ब्रह्म योग आश्रम पहुंची, जहां विश्व शांति के लिए शांति पाठ, हवन पूजन किया गया। तत्पश्चात भोजन प्रसाद का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों लोगों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।
विहंगम योग ऋषिकेश के प्रबंधक शुभ नारायण ठाकुर ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूरे देश विदेश में स्वर्वेद शोभा यात्रा का आयोजन किया गया है, इसी कड़ी में ऋषिकेश शीशम झाड़ी स्थित आश्रम में भी नव संवत्सर पर स्वर्वेद शोभा यात्रा निकाली गई।
आपको बता दें कि ‘स्वर्वेद’ सनातन पुराण ब्रह्मविद्या का सद्ग्रंथ है, किसी आधुनिक सम्प्रदाय, मत का ग्रन्थ नहीं है। ‘स्वर्वेद’ का विषय अध्यात्म अर्थात् ब्रह्मविद्या है एवं बाह्य तत्त्वज्ञान, आभ्यन्तर-भेद-साधन दोनों का उपदेश है – सदगुरु सदाफलदेव जी महाराज।
‘स्वः’ आनन्द को कहते हैं और आकाश एवं वाणी को भी ‘स्वः’ परमब्रह्म का नाम भी है अतएव ‘स्वः’ यानी परब्रह्म सत्पुरुष अनिर्वाच्य निःशब्द का जो ‘वेद’ अर्थात् ज्ञान है -वह स्वर्वेद है। स्वः को बतलाने वाला जो वेद यानी ज्ञान है- वह स्वर्वेद है। वेद ज्ञान को कहते हैं एवं सत्ता तथा लाभ को भी,चारों वेदों में भौतिक या आध्यात्मिक समस्त विषयों का वर्णन किया गया है, परन्तु स्वर्वेद में एकमात्र ब्रह्मविद्या के बाह्य और आभ्यन्तर तत्वज्ञान का ही वर्णन है। अतएव ‘स्वर्वेद’ अध्यात्म-सम्बन्धी विषयों का वर्णन करने वाला हिन्दी साहित्य में एक अद्वितीय ग्रन्थ है। – सदगुरु आचार्य धर्मचन्द्रदेव
‘स्वर्वेद’ शब्द का अर्थ होता है – स्वः अर्थात् ब्रह्म और वेद अर्थात् ज्ञान! अतः, स्वर्वेद ब्रह्मज्ञान सम्बन्धी एक महान आध्यात्मिक ग्रन्थ है! – सदगुरु आचार्य स्वतंत्रदेव जी
स्वर्वेद मानव जाति के उत्थान का आध्यात्मिक सद्ग्रंथ है, इसके शब्द-शब्द में अदभुत चमत्कार भरा हुआ है – संत प्रवर श्री विज्ञानदेव!
आज स्वर्वेद शोभायात्रा कार्यक्रम में मुख्य रूप से ठाकुर शुभ नारायण सिंह, रंजीत ठाकुर, सुनील कुमार सिंह,
डाक्टर रामाशंकर प्रसाद, सुमंत कुमार, ब्रज किशोर पांडे, भूपेंद्र सिंह, आशा रावत, पिंकी, महादेव पांडे, अमरावती देवी, हेमवती देवी, पुष्पा देवी, प्रमोद गुप्ता, श्याम नारायण सिंह, लेखराज, सतीश विश्वकर्मा, सरिता देवी, सुनील तिवारी, संजय कुमार, महर्षि विद्यार्थी, कल्याण सिंह नेगी, ऋषिकेश विद्यार्थी, भूपेंद्र यादव, राकेश मोर्य, अजय कुमार, सुमित सिंह, दुर्गा केवट ,अनामिका ठाकुर, सुमित, हरिओम, चित्रलेखा शर्मा, मीना, इंदू, विभा सिंह, अशोक कुमार, परमजीत सिंह, आदेश सैनी, ऋषि गुप्ता सहित भारी संख्या में लोग शामिल हुए।