इंटेलिजेंस सिपाहियों की वरिष्ठता सूची को लेकर उठा विवाद, ट्रिब्यूनल ने मांगा नियमानुसार स्पष्टीकरण

उत्तराखंड पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग में सिपाहियों की वरिष्ठता सूची को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस सूची को लोक सेवा अधिकरण (ट्रिब्यूनल) में चुनौती दी गई है, जिसमें याचिकाकर्ता सिपाहियों का कहना है कि उनकी वरिष्ठता नियुक्ति तिथि के आधार पर निर्धारित की गई है, जबकि नियुक्ति प्रक्रिया की वास्तविकता और समान परीक्षा-प्रशिक्षण की स्थिति को नजरअंदाज किया गया है।

वरिष्ठता पर सवाल: मेरिट बनाम नियुक्ति तिथि
याचिका में सिपाहियों ने तर्क दिया कि उन्होंने एक ही दिन परीक्षा पास की, एक ही दिन प्रशिक्षण पूरा किया, लेकिन उनकी नियुक्ति की तिथियां अलग-अलग हैं, जो विभागीय प्रक्रियाओं की देरी और अन्य कारणों से हुई थीं। ऐसे में, वरिष्ठता निर्धारण में मेरिट को आधार बनाना चाहिए न कि नियुक्ति तिथि को।

सिपाही पक्ष के अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठता तय करना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे योग्य कर्मियों के साथ अन्याय भी हो रहा है।

प्रशासन का पक्ष और ट्रिब्यूनल का निर्देश
वहीं, सहायक अभियोजन अधिकारी ने याचिका को जल्दबाजी में दायर बताया और कहा कि वरिष्ठता सूची अभी अस्थायी है तथा आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुई है। उन्होंने ट्रिब्यूनल से अनुरोध किया कि विभाग को नियमानुसार निर्णय लेने का अवसर दिया जाए।

इस पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने याचिका खारिज करते हुए पुलिस विभाग को नियमानुसार वरिष्ठता सूची जारी करने का आदेश दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश अंतिम नहीं है और दोनों पक्षों की दलीलें खुली रहेंगी।

ट्रिब्यूनल ने यह भी निर्देश दिया कि पुलिस विभाग 12 सप्ताह के भीतर संबंधित दस्तावेजों के साथ वरिष्ठता सूची प्रस्तुत करे और दोनों पक्ष एक बार फिर से विस्तृत सुनवाई में उपस्थित हों।

60 सिपाहियों की पदोन्नति, लेकिन निर्णय के अधीन
इंटेलिजेंस विभाग ने शुक्रवार को 60 सिपाहियों की पदोन्नति के आदेश जारी किए हैं, लेकिन इन्हें ट्रिब्यूनल के अंतिम निर्णय के अधीन रखा गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह पदोन्नतियां नियमों के तहत और वर्तमान वरिष्ठता सूची के आधार पर की गई हैं।

महत्वपूर्ण मोड़ पर मामला
ट्रिब्यूनल का यह निर्देश इंटेलिजेंस सिपाहियों की वरिष्ठता को लेकर चल रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि विभाग नए सिरे से समीक्षा कर वरिष्ठता सूची को किस आधार पर अंतिम रूप देता है – मेरिट या नियुक्ति तिथि।

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