उत्तराखंड वन विभाग ने दुर्लभ फिशिंग कैट का सफल बचाव किया, पुनर्वास कार्य भी शुरू

उत्तराखंड के तराई पूर्वी डिवीजन में वन विभाग ने एक दुलर्भ फिशिंग कैट का सफल बचाव किया और उसका पुनर्वास कार्य भी शुरू कर दिया है। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है, और इसके संरक्षण को लेकर वन विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

15 मार्च को बराकोली सितारगंज रेंज में वनकर्मियों ने गश्त के दौरान एक संकटग्रस्त फिशिंग कैट को गंभीर अवस्था में देखा। बिल्ली के शरीर का पिछला हिस्सा पूरी तरह से काम नहीं कर रहा था। इसकी स्थिति को देखते हुए, वनकर्मियों ने तुरंत उसे नैनीताल रेस्क्यू सेंटर भेजा। वहां उपचार के बाद, अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हो चुकी है और वन विभाग ने उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया है।

प्रशिक्षु आईएफएस आदित्य रत्न ने बताया कि इस सफल बचाव अभियान में पश्चिमी सर्कल के मुख्य वन संरक्षक, तराई ईस्ट के डीएफओ, डीएफओ नैनीताल, चिकित्सा स्टाफ और बराकोली सितारगंज रेंज के वनकर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

फिशिंग कैट एक मध्यम आकार की बिल्ली प्रजाति है, जो मुख्य रूप से आर्द्रभूमि (वेटलैंड) में पाई जाती है। यह प्रजाति भारत के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है, लेकिन उत्तराखंड में इसकी उपस्थिति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है।

ग्रेटर कॉर्बेट में फोटोग्राफिक प्रमाण
अक्टूबर 2023 में ग्रेटर कॉर्बेट लैंडस्केप में फिशिंग कैट का पहला फोटोग्राफिक प्रमाण प्राप्त हुआ था। इससे पहले इस प्रजाति के बारे में व्यापक सर्वेक्षण किए गए थे, लेकिन कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में इस प्रजाति के पाए जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं था। इस खोज का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह प्रजाति अत्यंत दुलर्भ है।

आईयूसीएन द्वारा संकटग्रस्त घोषित
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने फिशिंग कैट को संकटग्रस्त श्रेणी में सूचीबद्ध किया है। इसका मतलब यह है कि इस प्रजाति के अस्तित्व को गंभीर खतरा है। आर्द्रभूमि के विनाश, प्रदूषण और मानवीय अतिक्रमण के कारण इनके प्राकृतिक आवासों का नुकसान हो रहा है, जो इनके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।

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