वक्फ संशोधन विधेयक 2024: उत्तराखंड के वक्फ बोर्ड और मदरसा बोर्ड ने बताया ऐतिहासिक, विपक्ष पर साधा निशाना

संसद में पेश होने जा रहे वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। राज्य के मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन मुफ्ती शमून काजमी और वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे भारतीय मुसलमानों के लिए एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम बताया है।

शमून काजमी का कांग्रेस पर आरोप
मुफ्ती शमून काजमी ने कहा कि,

“यह विधेयक भारतीय मुसलमानों के लिए एक नई दिशा तय करेगा। आजादी के बाद कांग्रेस ने मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया, नतीजा यह हुआ कि वक्फ संपत्तियां कभी उनके असली उद्देश्य — गरीबों की भलाई — तक नहीं पहुंच पाईं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की कई संपत्तियों को मॉल और कार्यालयों में तब्दील कर दिया गया, जबकि वे मूलतः शैक्षिक और सामाजिक कल्याण के लिए थीं।
काजमी ने सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को “राजनीतिक मुसलमान” करार देते हुए कहा कि ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक कांग्रेस का साथ दिया और अब भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।

शादाब शम्स: “यह विधेयक मुसलमानों के लिए ‘उम्मीद’ है”
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने विधेयक को लेकर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि यह गरीब मुसलमानों के लिए ‘उम्मीद की किरण’ है। उन्होंने कहा,

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि वक्फ संपत्तियों का लाभ गरीब मुसलमानों तक पहुंचे, न कि राजनीतिक या धनी वर्गों तक।”
शम्स ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को ‘उम्मीद की किरण’ बताते हुए कहा कि यह विधेयक वक्फ के दुरुपयोग को रोककर पारदर्शिता लाएगा। उन्होंने विपक्षी पार्टियों — कांग्रेस, सपा, आप और जेडी(U) — पर निशाना साधते हुए कहा कि

“विपक्ष के पास 70 साल थे, लेकिन उन्होंने वक्फ को लूटा। अब जब सुधार हो रहा है, तो वे डर दिखा रहे हैं कि मस्जिदें छीन ली जाएंगी।”

एनजीओ और संगठनों पर भी आरोप
शादाब शम्स ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि

“ये संगठन वक्फ से मिलने वाले फायदों को बचाए रखना चाहते हैं, न कि मुसलमानों को आगे बढ़ाना।”

आगे की राह
दोनों चेयरमैनों ने आशा जताई कि वक्फ संशोधन विधेयक 2024 जल्द ही संसद में पारित होगा और इसके बाद वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन सुसंगत, पारदर्शी और गरीब-हितैषी होगा।

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