देहरादून : उत्तराखंड में लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) घोटाले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) अपराध एवं कानून व्यवस्था वी. मुरूगेशन ने 26 मार्च को सभी जनपद प्रभारियों और परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस प्रकरण की समीक्षा की और कई सख्त निर्देश जारी किए।
मुख्य निर्देश और कार्रवाई:
राज्य में LUCC के खिलाफ अब तक कुल 7 एफआईआर दर्ज की गई हैं। ADG मुरूगेशन ने समीक्षा के दौरान स्पष्ट किया कि इस मामले में जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और अभियुक्तों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित निवेशकों की शिकायतों पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।
लुक आउट सर्कुलर (LOC) और रेड कॉर्नर नोटिस (RCN):
राज्य में LUCC की लगभग 35 शाखाएं संचालित हो रही थीं। अभियुक्तों के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए उनके खिलाफ LOC और RCN जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए इंटरपोल से सहयोग लिया जाएगा।
पुलिस कस्टडी रिमांड:
उत्तर प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद LUCC के आरोपी संचालकों को वारंट-बी के तहत उत्तराखंड लाकर पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी। उनसे ठगी गई रकम और संपत्तियां बरामद की जाएंगी।
बैंक खाते फ्रीज और मनी ट्रेल:
आरोपियों के बैंक खातों को मनी ट्रेल के आधार पर फ्रीज किया जाएगा। अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को भी अधिग्रहित किया जाएगा।
ईडी, आयकर और ROC को रिपोर्ट:
सभी दर्ज मामलों की विस्तृत रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग को भेजी जाएगी। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) से संबंधित दस्तावेज़ लेकर UPID एक्ट 2005 और बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स एक्ट 2019 के तहत नए मुकदमे दर्ज करने के भी निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक में उपस्थित अधिकारी:
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक नीलेश आनंद भरणे, पुलिस उपमहानिरीक्षक धीरेन्द्र गुंज्याल, पुलिस अधीक्षक सीआईडी यशवंत चौहान सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
सख्त संदेश:
पुलिस विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि LUCC संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी ताकि पीड़ित निवेशकों को न्याय मिल सके और भविष्य में इस प्रकार के वित्तीय अपराधों पर रोक लगाई जा सके।