बरसात का मौसम, गड्ढे और पेयजल की लीकेज

नरेश रोहिला

मुख्यमंत्री कितना भी समझाएं। समय से और सही ढंग से काम करने के कितने भी निर्देश दें। मंत्री और बड़े अफसर विभागों की समीक्षा बैठकों में चाहे सख्ती से निर्देश दें या नरमी से अधिकारियों, कर्मचारियों के काम करने की शैली में कोई बदलाव आज तक आता दिखाई नहीं दिया। काम छोटा हो या बड़ा, उन्हें तो अपने तरीके से और अपने हिसाब से ही करना है। इसका अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री और और बडे अफसरों के स्तर पर बरसात से पहले सड़कों पर तमाम गड्ढे भरे जाने की बात कही गयी लेकिन आपको बरसात में भी अनेक स्थानों पर ऐसे गड्ढे मिल जाएंगे जिन्हें भरना तो दूर खुद विभाग गड्ढा खोदकर भूल जाते है।

खोदा गया गड्ढा और जंग से गल चुका बिजली का पोल

मैं शहर को छोडकर एमडीडीए की केदारपुरम कालोनी की बात कर रहा हूं। यहां इन्द्रपुर रोड़ पर ई- ब्लाक के पास सप्ताह भर से भी पहले एक गड्ढा खोदा गया। किस विभाग और किसके निर्देश पर खोदा गया, नहीं पता लेकिन इसे आज तक वापस भरा नहीं जा सका।

कहा जा रहा है कि यह गड्ढा बिजली के पुराने पोल को बदलने के खोदा गया। क्षेत्रीय पार्षद श्रीमती सुशीला रावत का भी सरसरी तौर पर यही कहना है कि आजकल बिजली विभाग द्वारा पुराने खम्भों को बदलने का काम किया जा रहा है। शायद इसीलिए गड्ढा खोदा गया।

लगता है यही सही भी है क्योंकि जहां गड्ढा है वहीं बिजली का एक खम्भा भी है जो एक दूसरे खम्भे की स्पोर्ट लिए हुए है। बिजली का यह खम्भा नीचे गल चुका है। फोटो में आप यह देख सकते हैं। इस लिहाज से इसे बदला जाना जरूरी है लेकिन सवाल यह है कि यदि बिजली पोल को बदलने के लिए गड्ढा खोदा गया तो एक सप्ताह से अधिक समय हो जाने के बाद भी इसे बदला क्यों नहीं गया। रोज बारिश हो रही है और गड्ढे में पानी भर जाता है। बारिश के मौसम कोई गड्ढे गिर कर चोटिल भी हो सकता है। यहीं नहीं ऐसे में खम्भे के गिर जाने की भी आशंका बनी हुई है। इससे बडी दुर्घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

टेढा हो चुका बिजली का सीमेंटड पोल

इसी तरह एक सीमेंट का बिजली का खम्भा टेढा खड़ा है। खम्भे का ऊपरी सिरा एक मकान को छूता दिखता है।

पेयजल लाइन लीकेज की समस्या बनी हुई है। एक स्थान पर पिछले दो तीन दिनों से पानी सडक फोड कर फव्वारे की बाहर निकल रहा है। पेयजल पाइप लाइन लीकेज को लेकर तो मैं खुद दो दिन में दो बार संबंधित विभाग के अधिकारी को फोन पर सूचना दे चुका हूं। उधर से जल्द ठीक कराने का आश्वासन भी दिया गया लेकिन समस्या आज सुबह तक भी बनी हुई थी। पेयजल लीकेज के अलग खतरे है। लीकेज ठीक न हो तो गंदे पानी की समस्या उत्पन्न हो सकती है। बरसात के मौसम जब जलजनित बीमारियां बढ जाती है तब गंदा पानी सेहत के लिए और खतरनाक सिद्ध हो सकता है।

हालांकि यह बात तो सिर्फ केदारपुरम की है लेकिन शहर के दूसरे इलाके भी ऐसी समस्याओं से अछूते नहीं है। स्मार्ट सिटी निर्माण कार्यों के लिए भी तो जगह – जगह सडकें खुदी पडी है।

बहरहाल संबंधित विभागों को ऐसी छोटी समस्याओं का तीव्रता से समाधान करना चाहिए। विद्युत और पेयजल से जुडी समस्याओं को तो तुरंत हल किया जाना चाहिए। चाहे वह खोदे गए गडढें या पेयजल लीकेज।

विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों को जनता की न सही पर मुखिया पुष्कर सिंह धामी और और उच्चाधिकारियों की तो सुननी चाहिए जो रोज सचिवालय में बैठक करके जनसमस्याओं के प्राथमिकता से समाधान की बात करते हैं।

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