उत्तराखंड में 200+ मदरसों ने अब तक नहीं लिया मान्यता का आवेदन, बोर्ड भंग होने के बाद भी प्रक्रिया अधूरी

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग के दो महीने बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में मदरसे बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं।राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अनुसार, नियमों का पालन न करने वाले ऐसे मदरसों को बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश सरकार ने एक जुलाई 2026 को मदरसा बोर्ड भंग कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था, ताकि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा सके। प्राधिकरण के अनुसार, पहले सत्र में सात मदरसों समेत नौ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता दी जा चुकी है, जबकि 26 अन्य मदरसों को भी मान्यता देने की प्रक्रिया जारी है।

प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक, बिना मान्यता के संचालित मदरसों में पढ़ रहे बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे बच्चों को मिड डे मील, स्कूल ड्रेस, मुफ्त किताबें जैसी सरकारी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और उनके प्रमाणपत्र भी मान्य नहीं होते।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने स्पष्ट किया है कि आवेदन न करने वाले मदरसों को बंद करने की कार्रवाई जिला प्रशासन के माध्यम से की जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।

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