उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार के रुड़की कोतवाली क्षेत्र में हुए चर्चित हत्याकांड के दो आरोपियों जैद कुरैशी और अनस कुरैशी को जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने दोनों की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया मामला बेहद गंभीर है और इस स्तर पर उन्हें राहत देने का कोई आधार नहीं बनता। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 103 (हत्या) समेत अन्य गंभीर धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। दोनों 10 जुलाई 2025 से जेल में बंद हैं।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि पुलिस ने आरोपियों के पास से धारदार हथियार, तबाल और चाकू, बरामद होने का दावा किया है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण किसी ठोस और कुंद वस्तु से लगी चोट बताया गया है। बचाव पक्ष ने इसे अभियोजन की कहानी में विरोधाभास बताते हुए जमानत की मांग की। साथ ही यह भी कहा कि मामले के चार अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर जैद और अनस को भी राहत मिलनी चाहिए।
हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि मुकदमे के इस चरण में चिकित्सा साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे ट्रायल प्रभावित हो सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया यह छह लोगों के समूह द्वारा पूर्व नियोजित तरीके से अंजाम दिया गया गंभीर अपराध प्रतीत होता है। ऐसे में केवल अन्य सह-आरोपियों को मिली जमानत के आधार पर दोनों आरोपियों को समान राहत नहीं दी जा सकती।
जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित सत्र न्यायालय को निर्देश दिया कि मामले के ट्रायल में तेजी लाई जाए और बिना किसी बाहरी प्रभाव के निष्पक्ष एवं शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित की जाए।