आयोग के अध्यक्ष एम.एल. प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने बाजार की परिस्थितियों और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया। आयोग ने अपने प्रारंभिक मसौदे में सोलर पीवी परियोजनाओं का टैरिफ 4.10 रुपये से घटाकर 3.96 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उरेडा और अन्य पक्षों ने पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक लागत, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों और सोलर मॉड्यूल की कीमतों में अस्थिरता का हवाला दिया। इन तर्कों के आधार पर आयोग ने प्रस्तावित कटौती वापस लेते हुए टैरिफ को 4.10 रुपये प्रति यूनिट पर ही बरकरार रखा।
रूफटॉप सोलर और छोटे ग्रिड इंटरएक्टिव संयंत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत 2 रुपये प्रति यूनिट की दर निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिल में राहत देने के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि एमएसएमई नीति के तहत मिलने वाली सरकारी सब्सिडी को सोलर टैरिफ में समायोजित नहीं किया जाएगा, जिससे इसका सीधा लाभ परियोजना स्थापित करने वाले युवाओं और उद्यमियों को मिलेगा।
कैनाल बैंक सोलर परियोजनाओं के संबंध में आयोग ने कहा कि अधिकांश परियोजनाएं नहर की ढलान के बजाय आसपास की समतल भूमि पर विकसित हो रही हैं। इसी कारण इनके लिए भी सामान्य सोलर परियोजनाओं के समान 4.10 रुपये प्रति यूनिट का टैरिफ लागू रहेगा। वहीं, अत्यधिक लागत के कारण आयोग ने वर्ष 2027-28 से सोलर थर्मल तकनीक के लिए अलग टैरिफ निर्धारित नहीं करने का निर्णय लिया है।