रिवर्स पलायन की दिशा में बड़ा कदम: ‘मुख्यमंत्री होमस्टे योजना’ के नियमों में भारी छूट और अनुदान में वृद्धि
देहरादून, 5 मई: उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों से होने वाले पलायन (Migration) को रोकने और रिवर्स पलायन को हकीकत में बदलने के लिए धामी सरकार ने 5 मई को ‘मुख्यमंत्री होमस्टे योजना’ में बड़े बदलाव लागू किए हैं। नई नीति के तहत अब गांव में अपना पुराना घर सुधार कर होमस्टे बनाने वाले युवाओं और स्थानीय निवासियों को दी जाने वाली सब्सिडी की सीमा को 33% से बढ़ाकर 50% (पर्वतीय क्षेत्रों के लिए) कर दिया गया है। साथ ही, होमस्टे के लिए अप्रूवल लेने की पूरी प्रक्रिया को 15 दिनों के भीतर ऑनलाइन पूरा करने की गारंटी दी गई है।
सरकार के इस फैसले से गांव-गांव में पर्यटन को एक नया स्वरूप मिल रहा है। अब पर्यटक केवल होटलों तक सीमित न रहकर सीधे गांव की जीवनशैली, स्थानीय गढ़वाली और कुमाऊंनी भोजन, और लोक संस्कृति का अनुभव कर सकेंगे। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि होमस्टे संचालकों को पहले तीन वर्षों तक बिजली और पानी का बिल घरेलू दरों पर ही देना होगा, न कि कमर्शियल दरों पर। इस फैसले का स्वागत करते हुए राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में युवाओं ने होमस्टे पंजीकरण के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है। सरकार का यह प्रयास पहाड़ की खाली हो रही जड़ों को फिर से हरा-भरा करने और अपनी मिट्टी से दूर गए लोगों को वापस अपने घर बुलाने की एक बेहद मजबूत और सकारात्मक पहल साबित हो रही
है।