उत्तराखंड में 20 साल बाद न्यूनतम वेतन बढ़ा, लाखों श्रमिकों को राहत।

मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद 50 या उससे अधिक श्रमिकों वाली इंजीनियरिंग इकाइयों और उद्योगों के लिए न्यूनतम मजदूरी की नई दरें तय कर दी गई हैं।

उत्तराखंड में धामी सरकार ने उद्योगों, इंजीनियरिंग इकाइयों, निजी और अनुसूचित संस्थानों के तीन लाख से अधिक श्रमिकों को बड़ी राहत दी है। करीब 20 साल बाद न्यूनतम वेतन में संशोधन किया गया है, जबकि निजी व अनुसूचित संस्थानों के श्रमिकों के लिए वीडीए बढ़ाकर 518 रुपये कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंजूरी के बाद 50 या उससे अधिक श्रमिकों वाले उद्योगों और इंजीनियरिंग इकाइयों के लिए न्यूनतम मजदूरी की नई दरें तय कर दी गई हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, इन इकाइयों में वेतन संशोधन करीब 20 साल से लंबित था।

उत्तराखंड में धामी सरकार ने तीन लाख से अधिक श्रमिकों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंजूरी के बाद 50 या उससे अधिक श्रमिकों वाली इंजीनियरिंग इकाइयों और उद्योगों के लिए न्यूनतम मजदूरी की नई दरें तय की गई हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी।

करीब 20 साल बाद हुए इस वेतन संशोधन के तहत अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रमिकों की नई दरें निर्धारित की गई हैं। इसके साथ ही निजी और अनुसूचित संस्थानों के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (वीडीए) बढ़ाकर 518 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।

नई व्यवस्था का लाभ दुकानों, होटल-रेस्टोरेंट, अस्पताल, पेट्रोल पंप, ईंट-भट्टा, निजी शिक्षण संस्थानों समेत कई क्षेत्रों के श्रमिकों को मिलेगा। सरकार ने निर्देश जारी कर दिए हैं कि इसका लाभ मई के वेतन में दिया जाएगा।

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