राष्ट्रीय प्रवासी दिवस: शहरों से लौटे प्रवासियों ने गांव में रची सफलता की नई कहानी, रोज़गार के लिए स्वरोजगार को बनाया सहारा

पिछले पांच सालों के दौरान 27 देशों से लौटे 169 प्रवासी उत्तराखंडी अपने गांवों में वापस आए हैं। विदेशों में अर्जित अनुभवों का उपयोग करते हुए इन प्रवासियों ने आजीविका के लिए स्वरोजगार का रास्ता चुना है। वहीं, प्रदेश सरकार ने प्रवासियों को जोड़ने और सहयोग देने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में प्रवासी पंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया है।

रोज़गार और व्यवसाय की तलाश में गांवों से निकलकर देश-विदेश में बसे प्रवासी उत्तराखंडी अब अपने गांव लौटकर विकास की नई तस्वीर गढ़ रहे हैं। अपने अनुभव और कौशल के सहारे इन प्रवासियों ने आजीविका के लिए स्वरोजगार को अपनाया है। रिवर्स पलायन करने वाले प्रवासियों में से 39 प्रतिशत ने कृषि और बागवानी के क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां शुरू की हैं।

पिछले पांच वर्षों के भीतर उत्तराखंड के 13 जिलों में कुल 6282 प्रवासियों की गांव वापसी दर्ज की गई है। इनमें 169 प्रवासी विदेशों से लौटे हैं, जबकि 4769 प्रवासी देश के विभिन्न राज्यों से और 1127 प्रवासी अन्य जिलों से अपने पैतृक गांवों में वापस आए हैं।
उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की रिवर्स पलायन रिपोर्ट–2025 के मुताबिक, प्रदेश सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और रिवर्स पलायन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार चीन, दुबई, ओमान, भूटान, जाम्बिया, सिंगापुर, सऊदी अरब, मॉरीशस, कैलिफोर्निया, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान, कतर, नेपाल, कुवैत, कीनिया, मालदीव, हांगकांग, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, पोलैंड, रूस, तंजानिया, नाइजीरिया, अबूधाबी सहित कई देशों से 169 प्रवासी अपने मूल गांव लौटे हैं। इनमें सबसे अधिक प्रवासी टिहरी जिले से संबंधित हैं।

प्रवासी उत्तराखंडियों के पास रोजगार और व्यवसाय का व्यापक अनुभव था, जिसे उन्होंने गांव लौटकर उपयोग में लाया। सरकार की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उठाते हुए इन प्रवासियों ने अपने अनुभव के आधार पर विभिन्न आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत की। इनमें 39 प्रतिशत प्रवासियों ने कृषि और बागवानी को अपनाया, 21 प्रतिशत ने पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों और होम स्टे की शुरुआत की, 18 प्रतिशत ने पशुपालन को रोजगार का माध्यम बनाया, जबकि छह  प्रतिशत ने दुकान, रेस्टोरेंट और मसाला उद्योग जैसे व्यवसायों में कदम रखा।अपने स्वरोजगार के जरिए ये प्रवासी गांवों में अन्य लोगों के लिए भी सफलता और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगा रहे हैं।

हर जिले में प्रवासी पंचायत का आयोजन

रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस वर्ष प्रत्येक जिले में प्रवासी पंचायत आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल के तहत उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार कर रहा है। पंचायतों के माध्यम से गांव लौटे प्रवासियों की सफलता की कहानियों के साथ-साथ उनकी समस्याओं और जरूरतों पर भी चर्चा की जाएगी।

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