उच्च हिमालयी इलाकों में पाए जाने वाले औषधीय गुणों से युक्त सीबकथोर्न फल की खेती किसानों की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाएगी। प्रदेश सरकार इसके उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रही है। वहीं पिथौरागढ़ जनपद की दारमा और व्यास घाटियों में वन विभाग द्वारा सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस पहल शुरू की गई है।
सीबकथोर्न न केवल औषधीय गुणों से समृद्ध है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी पौधा माना जाता है। इसकी मजबूत जड़ें भूमि कटाव को रोकने में सहायक होती हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रेतीली मिट्टी के कारण कटाव की समस्या अधिक रहती है, जहां सीबकथोर्न प्रभावी समाधान साबित हो सकता है। व्यास घाटी के गरव्यांग गांव में सीबकथोर्न फल का सबसे अधिक उत्पादन होने की संभावना है। बाजार में सीबकथोर्न फल और उससे बने जूस की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रदेश सरकार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इसकी खेती को प्रोत्साहित करने की योजना पर काम कर रही है। यह फल समुद्र तल से लगभग तीन से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक उत्पादित होता है।