देहरादून में फैल रहा अवैध प्लॉटिंग का जाल, एमडीडीए ने जारी की 120 कॉलोनियों की सूची

देहरादून : राजधानी देहरादून में अवैध प्लॉटिंग का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के अनुसार, वर्तमान में शहर के 12 सेक्टरों में कुल 120 अवैध कॉलोनियां सक्रिय हैं। आम लोगों को भू-माफिया के जाल में फंसने से बचाने के लिए एमडीडीए ने इन कॉलोनियों की सूची सार्वजनिक कर दी है।

एमडीडीए की वेबसाइट पर अब इन अवैध कॉलोनियों का विवरण उपलब्ध है, जिसमें प्लॉटिंग का स्थान, कॉलोनाइजरों के नाम और खसरा नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल है। यह पहल खरीदारों को जागरूक करने के उद्देश्य से की गई है।

भू-माफिया पर लगातार कार्रवाई, लेकिन चुनौती बरकरार

एमडीडीए अब तक कई अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त कर चुका है। हाल ही में कंडोली क्षेत्र में अवैध रूप से बनाए गए मकानों पर बुलडोजर चलाया गया। वर्ष 2024 में 5000 बीघा से अधिक भूमि पर की गई अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया था। बावजूद इसके, भूमाफिया लगातार नए क्षेत्रों में सक्रिय हो रहे हैं और ग्रामीण इलाकों में प्लॉटिंग का काम जारी है।

ग्रामीण इलाकों में अधिक सक्रियता

सेक्टर 1 से 6 तक 44 अवैध कॉलोनियां सामने आई हैं, जो नूरीवाला, दीपनगर, धोरणखास, नागबल हटनाला, नवादा और किरसाली जैसे गांवों में स्थित हैं। वहीं, सेक्टर 7 से 10 में 55 और सेक्टर 11-12 में 23 अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई है। इन इलाकों में जोहड़ीगांव, गल्जवाड़ी, फुलसणी, बगराल, नकरौंदा आदि प्रमुख हैं।

कृषि भूमि पर हो रही प्लॉटिंग, खरीदार हो रहे धोखे का शिकार

एमडीडीए केवल आवासीय भूमि पर प्लॉटिंग की अनुमति देता है, लेकिन भूमाफिया कृषि भूमि पर भी अवैध रूप से प्लॉट काटकर बेच रहे हैं। कम कीमत में प्लॉट मिलने के लालच में लोग धोखे का शिकार हो रहे हैं।

कुछ प्रमुख मामले:

धर्मावाला केस: यहां 100 बीघा कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग की गई थी। एमडीडीए ने तीन बार कार्रवाई कर इस क्षेत्र में निर्माण कार्य ध्वस्त किया।

शिमला बाईपास मामला: मेहंदीपुर गांव में 22 बीघा और बाईपास रोड पर 5 बीघा भूमि पर अवैध प्लॉटिंग को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया।

खरीदारों के लिए चेतावनी

एमडीडीए सचिव एमएस बर्निया ने लोगों से अपील की है कि वे केवल पंजीकृत कॉलोनियों में ही प्लॉट खरीदें। उन्होंने कहा, “हम लगातार अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई कर रहे हैं। खरीदारों को सतर्क रहना चाहिए और एमडीडीए की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी की जांच अवश्य करें।”

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