
एसकेविरमानी / ऋषिकेश । तीर्थ नगरी में 27 जून को जी – 20 सम्मेलन के मद्देनजर करोडों रूपए खर्च करके किए जा रहे सौन्दर्यीकरण और साफ सफाई के बावजूद अगर मखमली टाटा में पैबंद नजर आए तो क्या कहेंगे। कम से कम ऊर्जा विभाग के कार्य में यही नजर आ रहा है। जी – 20 सम्मेलन को लेकर पूरा प्रशासनिक अमला मानो शहर के कायाकल्प में जुटा है और जगह- जगह सौन्दर्यीकरण के तहत विभिन्न कार्य कराए जा रहे है। ऊर्जा विभाग भी इस काम में लगा है और पुराने खम्भों, लाइनों को बदला जा रहा है। हालांकि इस काम के चलते शहर के लोगों को परेशानी भी हो रही है इसलिए कि कई- कई घंटे इसी वजह से बिजली गुल रहती है। ऊर्जा विभाग द्वारा देहरादून रोड पर तमाम पुराने खम्भों को बदला गया लेकिन की जगह अब भी मखमल के कालीन में टाट के पैबंद नजर आ रहे है। व्यापार सभा भवन के पास भी एक खम्भे को बदल दिया गया लेकिन हैरानी की बात है कि उस खम्भे को सपोर्ट देने वाला खम्भा पुराना ही छोड दिया गया जो अलग ही नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि पुराने खम्भे के साथ तो स्पोर्ट वाले खम्भे की जरूरत रही होगी लेकिन जब नया खम्भा लगाया गया तो फिर सपोर्टिंग खम्भे की आवश्यकता क्यों महसूस की गयी। लगता है ऊर्जा विभाग को नया खम्भा विकलांग लग रहा है जिसे बैसाखी की जरूरत है। और सपोर्टिंग खम्भा लगाना ही था तो फिर उसे भी नया ही लगाना चाहिए था। उसे पुराना ही क्यों छोड दिया गया। इसमें भी कुछ खेल है क्या? लोग यह पूछ रहे है लेकिन जवाब दे कौन ?