उत्तराखंड में नई आबकारी नीति लागू: 7 मार्च से शुरू होगी शराब दुकानों के नवीनीकरण की प्रक्रिया
देहरादून। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उत्तराखंड सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत देशी और विदेशी शराब की दुकानों के नवीनीकरण और आवंटन की प्रक्रिया की तिथियां घोषित कर दी हैं। राज्य भर में शराब की सभी खुदरा दुकानों के लिए नवीनीकरण प्रक्रिया 7 मार्च से 16 मार्च तक चलेगी।
यदि इस अवधि के भीतर कुछ दुकानें नवीनीकरण से बाहर रह जाती हैं, तो उनके लिए लॉटरी प्रणाली के तहत नया आवंटन किया जाएगा। पहली चरण की लॉटरी के लिए आवेदन 19 से 21 मार्च तक लिए जाएंगे और 22 मार्च को लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यदि इसके बाद भी दुकानें खाली रहती हैं, तो 23-24 मार्च तक दूसरे चरण के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे और 24 मार्च की शाम 5 बजे तक दूसरी लॉटरी प्रक्रिया संपन्न कर दी जाएगी।
वेबसाइट और कार्यालयों से मिलेगी जानकारी
आवेदक शराब दुकानों की उपलब्ध सूची, राजस्व विवरण, शर्तें एवं नियम और अन्य आवश्यक जानकारी आबकारी विभाग की वेबसाइट www.uttrakhandexcise.org.in तथा www.uk.gov.in पर प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त ये जानकारियां जिला मजिस्ट्रेट, जिला आबकारी अधिकारी और आबकारी आयुक्त कार्यालय में भी उपलब्ध रहेंगी।
“राजस्व वृद्धि पर फोकस, नहीं बढ़ेगी खपत” – आबकारी आयुक्त
आबकारी आयुक्त हरिचंद सेमवाल ने जानकारी दी कि नई नीति का उद्देश्य शराब की खपत को नहीं, बल्कि राजस्व में वृद्धि को प्राथमिकता देना है। उनके अनुसार, नीति में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कई सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि लगातार दो वर्षों से निर्धारित राजस्व लक्ष्य पूरा कर रहे मौजूदा लाइसेंसधारकों को नवीनीकरण का अवसर दिया गया है, जिससे व्यवस्थित संचालन को बढ़ावा मिलेगा।
नई आबकारी नीति के प्रमुख बदलाव
1. राजस्व लक्ष्य:
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5060 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को देखते हुए एक अप्रैल से शराब की कीमतों में आंशिक बढ़ोतरी संभावित है।
2. धार्मिक स्थलों के पास दुकानें बंद होंगी:
नई नीति में स्पष्ट प्रावधान है कि धार्मिक स्थलों के निकट शराब की दुकानें बंद की जाएंगी।
3. एमआरपी उल्लंघन पर सख्ती:
निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेचने वाले लाइसेंसधारियों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।
4. स्थानीय वाइन उद्योग को प्रोत्साहन:
पर्वतीय क्षेत्रों में वाइनरी संचालकों को बढ़ावा देने के लिए 15 वर्षों तक शुल्क में छूट का प्रावधान किया गया है।