देहरादून नगर निगम की ओर से 47 वार्डों में जारी की गई सफाई कार्यों की निविदा अब विजिलेंस जांच के घेरे में आ गई है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर शुक्रवार को विजिलेंस टीम ने नगर निगम में दस्तावेजों की छानबीन शुरू कर दी। टीम को शाम चार बजे तक संबंधित दस्तावेज सौंपने का समय दिया गया था, जिसके चलते नगर निगम कार्यालय में पूरे दिन अफरातफरी का माहौल रहा।
सुबह से ही तैयारियों में जुटा रहा नगर निगम, 10,000 दस्तावेज तैयार किए गए
नगर निगम अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह 9 बजे से ही कार्यालय में डेरा डाल दिया। बताया जा रहा है कि निविदा प्रक्रिया से संबंधित करीब 5,000 दस्तावेज तैयार किए गए, जिनकी दो-दो प्रतियां बनानी पड़ीं। इस कारण कर्मचारियों को करीब 10,000 दस्तावेजों की छायाप्रति (फोटोकॉपी) तैयार करनी पड़ी।
सफाई अनुभाग के कर्मचारियों ने एक साथ कई प्रिंटरों की मदद से फोटोकॉपी का कार्य संभाला। दिनभर निगम कार्यालय में कागजात जुटाने, छांटने और कॉपी करने का कार्य चलता रहा, जिस पर विजिलेंस की टीम की लगातार नजर बनी रही।
विजिलेंस टीम का निगम में डेरा, दस्तावेजों की जांच जारी
विजिलेंस की टीम सुबह से ही नगर निगम कार्यालय में मौजूद रही, ताकि दस्तावेजों की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके। टीम ने सफाई अनुभाग के अधिकारियों से बातचीत की और दस्तावेजों की प्रतियों का सत्यापन भी शुरू किया।
सूत्रों के मुताबिक, नगर निगम में दिनभर विजिलेंस की उपस्थिति से अधिकारियों और कर्मचारियों में तनावपूर्ण माहौल रहा। टीम ने देर शाम तक निगम परिसर में रहकर दस्तावेजों की जांच की।
मेयर बोले—कार्यभार ग्रहण से पहले की प्रक्रिया, अदालत के आदेश को मानेंगे
जब नगर निगम के मेयर सौरभ थपलियाल से इस मामले में प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया उनके कार्यभार संभालने से पहले की है। उन्होंने बताया, “नगर निगम द्वारा देहरादून के 47 वार्डों में सफाई व्यवस्था बेहतर करने के उद्देश्य से निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी। मामला अब न्यायालय के अधीन है और विजिलेंस जांच कर रही है।”
मेयर ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय जो भी निर्णय देगा, नगर निगम उसका पालन करेगा।