देहरादून की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई अदालत ने करीब 15 साल पुराने पासपोर्ट धोखाधड़ी मामले में पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण और नरेश चंद्र द्विवेदी को दोषमुक्त कर दिया है। यह फैसला विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई संदीप सिंह भंडारी की अदालत ने सुनाया।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास था और लंबे समय के बाद उन्हें न्याय मिला है।
मामले में आचार्य बालकृष्ण पर भारतीय पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए कथित कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग का आरोप, जबकि नरेश चंद्र द्विवेदी पर प्रमाणपत्र में कूटरचना करने का आरोप लगाया था। सीबीआई ने दोनों के खिलाफ आईपीसी और पासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था।
यह मामला वर्ष 1998 में पासपोर्ट आवेदन और उसके लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा था, जिसकी शिकायत अखिल भारतीय संत समिति के तत्कालीन अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णन ने की थी। जांच के दौरान सीबीआई ने कई गवाहों के बयान और साक्ष्य प्रस्तुत किए, लेकिन अदालत ने अभियोजन पक्ष के सबूतों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
फैसले के बाद आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास था और लंबे समय के बाद उन्हें न्याय मिला है।