सफर
वो सफर ज़िन्दगी का बडा सुहाना था
घर मे जब मेरी भाभी को आना था।
इस रिश्ते के नाम से इतना प्यार था मुझे
जिसको भी इस रिश्ते में आना था
उसको ही मेरा सारा प्यार पाना था।।
वो सफर ज़िन्दगी का बड़ा सुहाना था
घर मे जब मेरी भाभी को आना था…।।।
सपना था जब रखे पहला कदम वो घर मे
हाथों से उतार के रख लू उसे अपने दिल मे।
हो पूरी हर ख्वाहिश उसकी
यही तमन्ना थी हर किसी के मन मे।।
वो सफर ज़िन्दगी का बड़ा सुहाना था
घर मे जब मेरी भाभी को आना था…।।।
बहु ना समझे उसको कोई, हक हो उसका पूरे घर में
वो भी प्यार से अपना ले सबको, बस जाए सब उसके मन मे।।
वो सफर ज़िन्दगी का बडा सुहाना था
घर मे जब मेरी भाभी को आना था…।।।
छोड़के वो आयी सबकुछ अपना
लेकर अपने मन मे कुछ सपना।
प्यार मिले उसको बस इतना
याद ना आये कभी उसको अपना अंगना।।
वो सफर ज़िन्दगी का बडा सुहाना था
घर मे जब मेरी भाभी को आना था।
याद रहे उसको जीवन की ये दूसरी पारी
खुशियां मिले उसको दुनिया जहां की सारी।।
दुनिया मे दिखे सबसे अलग सबसे न्यारी
मेरी भाभी बने सबकी प्यारी।।
वो सफर ज़िन्दगी का बडा सुहाना था
घर मे जब मेरी भाभी को आना था…।।।
🔵अंजलिरुहेला
अंबेहटा पीर(सहारनपुर )
