उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा किए गए मौन उपवास पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने रावत के इस कदम को “राज्य में हुए विकास कार्यों के खिलाफ झूठ और उपहास फैलाने की कोशिश” करार दिया।
“भ्रष्टाचार भुलाने की कोशिश कर रहे हैं रावत”: महेंद्र भट्ट
भट्ट ने कहा कि रावत अपने भ्रष्टाचार से भरे पुराने शासन की स्मृतियों से बचने के लिए मौन उपवास का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “हरीश रावत को अपने कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार और विफल नीतियों को भूलने की बीमारी हो गई है। उन्हें सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हो रहे ऐतिहासिक विकास कार्य नजर नहीं आते।”
भट्ट ने रावत पर झूठे आरोपों और निराधार वक्तव्यों के जरिये जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि उनका तथाकथित उपवास “सिर्फ मीडिया में बने रहने की कोशिश” है।
विकास कार्यों की सूची गिनाई
महेंद्र भट्ट ने मोदी सरकार और धामी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने पिछले वर्षों में कई क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है:
चारधाम सहित धार्मिक स्थलों का कायाकल्प
रेल, सड़क और हवाई संपर्क में बड़ा सुधार
पर्यटन और औद्योगिक निवेश में उछाल
3.75 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों में से 1 लाख करोड़ जमीन पर उतर चुके
फ्री राशन, उज्ज्वला योजना, अटल आयुष्मान योजना जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रम
भट्ट ने रावत से सवाल किया कि “क्या उन्हें ये योजनाएं और विकास कार्य दिखाई नहीं देते?”
“जनता ने हरीश रावत को पहले ही नकार दिया है”
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि रावत के आरोपों में सच्चाई होती, तो 2022 के विधानसभा चुनाव में जनता उन्हें नकारती नहीं। उन्होंने कांग्रेस और रावत दोनों को जनता और अपने ही कार्यकर्ताओं से ठुकराया गया नेता करार दिया।
“अब हरीश रावत के पास मौन धारण करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है,” भट्ट ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा।
बीजेपी का तीखा हमला, कांग्रेस का जवाब बाकी
भाजपा ने रावत के आंदोलन को राजनीतिक नाटक बताते हुए खारिज कर दिया है, जबकि कांग्रेस की ओर से इस पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मगर सियासी गलियारों में इस बयान के बाद एक बार फिर बीजेपी-कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध तेज होने की संभावना बन गई है।