महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर त्रियुगीनारायण मंदिर, जो भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह स्थल के रूप में जाना जाता है, एक बार फिर साक्षात विवाह स्थल में तब्दील हो गया। यहां देश के विभिन्न राज्यों से आए 7 जोड़ों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह बंधन में बंधकर इस पवित्र स्थल को अपनी नई जिंदगी की शुरुआत का साक्षी बनाया।
गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न प्रांतों से आए नवविवाहित जोड़ों ने मंदिर परिसर में वेदी के चारों ओर सात फेरे लिए और सैकड़ों श्रद्धालुओं और परिजनों की मौजूदगी में शिव-पार्वती के आशीर्वाद से वैवाहिक जीवन की शुरुआत की।
तीर्थपुरोहित समिति की देखरेख में विवाह
तीर्थपुरोहित समिति के सचिव सर्वेश्वरानंद भट्ट ने बताया कि समिति द्वारा समन्वय करते हुए सभी सात विवाह संपन्न कराए गए। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति से लेकर अब तक 40 से अधिक विवाह त्रियुगीनारायण मंदिर में हो चुके हैं और अक्षय तृतीया तक सभी विवाह तिथियों की बुकिंग पूरी हो चुकी है। यह दर्शाता है कि अब यह स्थल देशभर में विवाह हेतु एक आध्यात्मिक और पवित्र स्थान के रूप में लोकप्रिय हो रहा है।
श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्तिभाव का माहौल
महाशिवरात्रि पर त्रियुगीनारायण, सोनप्रयाग, गौरीकुंड और फाटा समेत पूरे रुद्रप्रयाग जिले में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर परिसर शिवभक्तों के “हर हर महादेव” और “जय शिव शंकर” के जयकारों से गूंज उठा। सुबह से लेकर देर शाम तक दर्शन, पूजन और भजन-कीर्तन का क्रम चलता रहा।
मंदिर प्रशासन और स्थानीय समितियों ने इस दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की थीं। पुलिस और प्रशासन द्वारा यातायात और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
त्रियुगीनारायण: वैवाहिक परंपराओं का केंद्र
त्रियुगीनारायण मंदिर वह स्थान है जहां भगवान विष्णु की साक्षी में भगवान शिव और माता पार्वती का पौराणिक विवाह संपन्न हुआ था। इस मान्यता के चलते, यहां विवाह करने को अति पुण्यकारी और शुभ माना जाता है। अब यह स्थल विवाह पर्यटन के रूप में भी उभर रहा है।