मोदी की गारंटी पर ही भरोसा
नरेशरोहिला
आगामी लोकसभा में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता ही आ रही है यह अब करीब करीब साफ हो गया। फिलहाल जनता को मोदी की गारंटी पर ही भरोसा है।पांच राज्यों में से चार विधानसभा चुनाव नतीजों ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। हाल ही में पांच राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव हुआ। रविवार को चार राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के नतीजे आ गए माना जा रहा था कि इस बार कांग्रेस इन राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करेगी लेकिन हकीकत यही है कि तेलंगाना को छोडकर कांग्रेस कहीं भी बढिया तो क्या साधारण सा प्रदर्शन भी नहीं कर पायी। तेलंगाना में कांग्रेस ने जरूर प्रचंड बहुमत हासिल किया और केसीआर को जबरदस्त शिकस्त दी लेकिन हिन्दी पट्टी के जिन तीन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन की जरूरत थी, वहां वह असफल हो गयी। मध्य प्रदेश में तो उसका प्रदर्शन खराब रहा ही। कब्जे वाले राजस्थान और छत्तीसगढ़ भी उसने गंवा दिए। दूसरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह रणनीति इन तीनों राज्यों में भाजपा को जिता गयी।मध्य प्रदेश जैसे राज्य में भाजपा सर्वाधिक 164 सीटों के साथ वापसी कर गयी जहां माना जा रहा था कि जनता का मूड डेढ दशक के शिवराज सिंह चौहान की सरकार के खिलाफ है लेकिन नतीजे कह रहे हैं कि इस बार तो वहां पहले से भी ज्यादा अच्छी स्थिति थी। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी अनुमानों के विपरीत भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया।राजस्थान में 115 और छत्तीसगढ़ में 54 सीट जीतकर उसने कांग्रेस को बहुत पीछे छोड़ दिया। जाहिर है कि इस जीत के पीछे भाजपा और उसके नेताओं की अचूक रणनीति रही लेकिन इससे भी ज्यादा हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों में जनता का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा नजर आया। उनकी उस गारंटी पर भरोसा दिखा जो अपनी चुनावी रैलियों में उन्होंने दी। आगामी लोकसभा चुनाव के नजरिए से यह नतीजे बेहद महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल यह मान कर चल रहे थे कि 2024 से पहले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव वे समीकरणों को उलट देंगे जिससे लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को कडी चुनौती दी जा सकेगी लेकिन इन राज्यों के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोई चुनौती देना कांग्रेस या समूचे विपक्ष के बस की बात नहीं है और न ही भाजपा की कोई काट उनके पास है। इन राज्यों के चुनावी नतीजों से कांग्रेस और उसके नेतृत्व में बना गठबंधन लोकसभा चुनाव से पहले ही बिखर न जाए। अब तो डर इसी बात का बनता दीख रहा है। इन नतीजों से भाजपा खेमा जहां फिर से प्रफुल्लित हैं वहीं कांग्रेस के पास यह कहने के सिवाए कुछ नहीं हैं कि वह इस पर गहरा मंथन करेगी को देखेगी कि जनता तक अपनी बात पहुंचाने में कहां कमी रहेगी। बहरहाल अब कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल कुछ भी विचार करते रहे फिलहाल तो बाजी उनके हाथ से निकल गयी और अब दिल्ली दूर ही लगती है।
