हरिद्वार में ‘विकास संकल्प पर्व’ का भव्य आयोजन: सीएम धामी ने 107 परियोजनाओं का किया लोकार्पण, कांवड़ और कुंभ की तैयारियों का खाका पेश

हरिद्वार। ऋषिकुल मैदान में शुक्रवार को आयोजित ‘विकास संकल्प पर्व’ उत्तराखंड की विकास यात्रा का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ओर जहां हरिद्वार को 550 करोड़ रुपये से अधिक की 107 विकास परियोजनाओं की सौगात दी, वहीं दूसरी ओर आगामी कांवड़ मेले और 2027 के महाकुंभ को लेकर सरकार की तैयारियों का रोडमैप भी साझा किया।

धार्मिक मेलों की भव्यता और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कांवड़ मेला और कुंभ मेला न केवल भव्य और दिव्य होंगे, बल्कि सुरक्षा, सफाई और व्यवस्था के लिहाज से भी कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

“हम हर पहलू पर पहले से ही तैयारियां कर रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।”

हरिद्वार को 107 विकास परियोजनाओं की सौगात

इस भव्य आयोजन में सीएम ने 107 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जिनकी कुल लागत 550 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं हरिद्वार की आधारभूत संरचना को सशक्त करेंगी और स्थानीय विकास को नई दिशा देंगी।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, नौकरियों में पारदर्शिता

सीएम धामी ने युवाओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड में भर्तियों का आधार अब केवल प्रतिभा और योग्यता है।

  • अब तक 24,000 पारदर्शी नियुक्तियां पूरी की जा चुकी हैं।
  • प्रदेश की बेरोजगारी दर में 4.4% की गिरावट दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।

उन्होंने दो टूक कहा,

“भ्रष्टाचारियों के लिए या तो सुधार का रास्ता है या जेल का दरवाजा।”

बेटियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की बेटियां अब सरकारी नौकरियों, स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं।

“हमने जो कहा, वो किया। और जो अब कहेंगे, वो भी पूरा करेंगे।”

राष्ट्रीय मंच पर चमक रहा उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी ने यह भी बताया कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स में उत्तराखंड को देश में पहला स्थान मिला है। यह राज्य की सक्षम नीतियों और ईमानदार शासन प्रणाली का प्रमाण है।

धर्मनगरी की धरती से संकल्प

मुख्यमंत्री ने यह दिन अपने लिए गर्व और संकल्प का दिन बताया। उन्होंने कहा कि यही दिन था जब उन्होंने राज्य की बागडोर संभाली थी, और हरिद्वार की पावन भूमि पर आकर उन्हें नई ऊर्जा मिलती है।

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