चारधाम यात्रा मार्ग के सिरोहबगड़ में भूस्खलन के स्थायी समाधान की दिशा में कदम, THDC ने शुरू किया तकनीकी अध्ययन

 

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के महत्वपूर्ण मार्ग श्रीनगर–रुद्रप्रयाग के बीच स्थित सिरोहबगड़ में लगातार भूस्खलन की समस्या से निपटने के लिए अब सरकार और एजेंसियों ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (THDC) ने इस संवेदनशील क्षेत्र का तकनीकी अध्ययन शुरू कर दिया है, ताकि यहां स्थायी सुरक्षात्मक ट्रीटमेंट कर मार्ग को हमेशा के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।

दो महीने में आएगी रिपोर्ट, फिर होगा पुनर्निर्माण
THDC के विशेषज्ञों ने क्षेत्र का प्रारंभिक सर्वेक्षण पूरा कर लिया है और विस्तृत अध्ययन प्रक्रिया जारी है। इस आधार पर सुरक्षात्मक उपायों की सिफारिशें की जाएंगी, जिन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा लागू किया जाएगा। रिपोर्ट के दो महीने के भीतर आने की संभावना जताई गई है।

तीन दशकों से बना हुआ है जोखिम
करीब 30 वर्षों से सिरोहबगड़ में लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिससे यह क्षेत्र चारधाम यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बना हुआ है। विशेष रूप से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की ओर जाने वाले हज़ारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आवागमन इस मार्ग पर निर्भर करता है।

वर्तमान में यह भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र लगभग 70 मीटर लंबा है, जहां हर वर्ष यात्रा के दौरान जेसीबी और आपातकालीन टीमें तैनात करनी पड़ती हैं।

पहली बार स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर पहल
इस बार पहली बार इतने वर्षों बाद सिरोहबगड़ क्षेत्र में स्थायी समाधान की योजना पर गंभीरता से कार्य शुरू हुआ है। THDC के भू-वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम क्षेत्र की भू-संरचना, जल बहाव, मिट्टी की स्थिरता और भूस्खलन के कारणों का विश्लेषण कर रही है।

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