उत्तराखंड: इस बार के राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई है, जिसमें फुटबॉल और नेटबॉल जैसे खेलों में उनका पहला प्रदर्शन देखने को मिला। राज्य ने मॉर्डन पेंटाथलान में 6 स्वर्ण पदक सहित कुल 14 पदकों के साथ इतिहास रच दिया। इसके साथ ही, नेटबॉल, लानबॉल और अन्य खेलों में भी खिलाड़ियों ने यह साबित किया कि उनके पास जितना मौका हो, वे उतनी ही कड़ी मेहनत से जीत हासिल कर सकते हैं।
राष्ट्रीय खेलों में भागीदारी और प्रदर्शन
नेशनल चैंपियनशिप में राज्यों के शीर्ष 8 में शामिल होने के बाद ही राष्ट्रीय खेलों में भाग लिया जा सकता है। पिछले वर्षों में उत्तराखंड की टीमें 37वें राष्ट्रीय खेलों (गोवा, 2023) और 2022 के गुजरात राष्ट्रीय खेलों में भाग नहीं ले पाई थीं। लेकिन इस बार उत्तराखंड के मेज़बान होने के कारण राज्य के खिलाड़ियों को फुटबॉल, लान टेनिस, लानबॉल, नेटबॉल और मॉर्डन पेंटाथलान जैसे खेलों में भाग लेने का अवसर मिला, और राज्य ने फुटबॉल में रजत पदक भी जीता।
नेटबॉल में राज्य को 2 रजत और 1 कांस्य पदक प्राप्त हुआ, जबकि वेटलिफ्टिंग में भी एक कांस्य पदक हासिल किया। लानबॉल में राज्य ने स्वर्ण पदक जीता, लान टेनिस में कांस्य, और योगासन में 1 स्वर्ण, 3 रजत और 1 कांस्य पदक जीते। इन सभी प्रयासों ने राज्य के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच पर एक और पहचान दिलाई।
विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं का योगदान
उत्तराखंड ओलंपिक संघ के महासचिव, डीके सिंह के अनुसार, राज्य के मेज़बान होने के कारण खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने से रोका नहीं गया। राज्य में विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं के विकास ने खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण और सुविधाएं प्रदान की, जिससे उनका प्रदर्शन और भी बेहतर हो सका। राज्य सरकार ने भी खेलों के लिए हर संभव मदद की, और खिलाड़ियों ने इसे अपनी मेहनत और प्रदर्शन से साबित किया।
अगला लक्ष्य: राष्ट्रीय खेलों में प्रदर्शन को दोहराना
उत्तराखंड ने 103 पदकों के साथ राष्ट्रीय खेलों में एक शानदार प्रदर्शन किया। खेलों के समापन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के विजेता खिलाड़ियों की सराहना की। हालांकि, अब राज्य के सामने अगली चुनौती है 39वें राष्ट्रीय खेलों में इस प्रदर्शन को दोहराने की। यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य के खिलाड़ी घर से बाहर अपनी सफलता को दोहराते हैं या नहीं, लेकिन वर्तमान प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड के खिलाड़ी अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं।