देहरादून: उत्तराखंड में पहली बार अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिलों में जिला जनजाति कल्याण अधिकारी (डीडब्ल्यूओ) की तैनाती का रास्ता साफ हो गया है। इससे जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच सकेगा। राज्य में पांच अनुसूचित जनजातियां हैं, जिनकी कुल आबादी करीब तीन लाख है।
देहरादून, चमोली, ऊधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ को अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिले के रूप में चिह्नित किया गया है। अब तक इन जिलों में जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं का क्रियान्वयन समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के माध्यम से किया जाता था। लेकिन योजनाओं को अधिक प्रभावी और त्वरित ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने इन जिलों के लिए जिला जनजाति कल्याण अधिकारी के नए पद सृजित किए हैं।
इन पदों की तैनाती को नियमसम्मत बनाने के लिए कैबिनेट ने उत्तराखंड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा संशोधन नियमावली-2025 को प्रख्यापित किए जाने को मंजूरी दे दी है। सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी ने बताया कि राज्य में प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव अभियान (पीएम जोगा) और पीएम जनमन जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। जिला स्तर पर समर्पित अधिकारियों की तैनाती से इन योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
वहीं, जनजाति कल्याण विभाग के निदेशक संजय सिंह टोलिया ने बताया कि चार जिलों में चार जिला जनजाति कल्याण अधिकारी तैनात किए जाएंगे। इनमें से दो अधिकारियों की नियुक्ति सीधी भर्ती के माध्यम से होगी, जबकि दो अधिकारी विभागीय स्तर से लिए जाएंगे। इनमें एक कार्यालय अधीक्षक आईटीआई से और दूसरा आश्रम पद्धति विद्यालय से तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संबंधित पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति से विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और जनजातीय समुदाय को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।