
एसकेविरमानी / ऋषिकेश, 12 जून। परमार्थ निकेतन में माननीय केन्द्रीय मंत्री, इस्पात मंत्रालय श्री राम प्रसाद सिंह सहपरिवार पहुंचे। उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भेंट कर आशीर्वाद लिया। तत्पश्चात उन्होंने परमार्थ गंगा आरती में सहभाग किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि कोयला खनन में स्थिरता लाने के महत्त्व को स्वीकार करते हुए कोयला खदानों में बेहतर पर्यावरण प्रबंधन को अपनाने व सतत विकास को बढ़ावा देने की अत्यंत आवश्यकता है। कोयला भारत का विशेष खनिज भंडार है जो आर्थिक विकास की रीढ़ है परन्तु इससे हो रही पर्यावरणीय क्षति को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्यावरण सुरक्षित तो हम सुरक्षित इसलिये सतत विकास के मंत्र के साथ आगे बढ़ना होगा।
स्वामी जी ने कहा कि नदियाँ जीविकादायिनी, जीवनदायिनी एवं मोक्षदायिनी हैं उनका संरक्षण ही विकास का प्रथम सोपान है। वर्तमान समय में हम सभी को यह सोचने की जरूरत है कि हमारे आस-पास की नदियाँ कैसी थी, कैसी हो गयी और उन्हें कैसे रखना है। यह हम सब को सोचना होगा तथा इसके लिये सरकार के साथ समाज के सभी वर्गों को अपनी जिम्मेदारी समझनी और निभानी होगी। सभी को नदियों और पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा तथा अपने टाइम, टैलेंट, टेक्नोलाॅजी एवं टेनासिटी के साथ हमारी नदियों के लिये हम सब को जुटना होगा, जुड़ना होगा और सब को जोड़ना होगा।

श्री राम प्रसाद सिंह ने बताया कि भारत लोहा, कोयला, डोलोमाइट, सीसा, जस्ता, चांदी, सोना आदि के विशाल भंडार के साथ-साथ खनन और धातु उद्योग के लिये एक प्राकृतिक गंतव्य है। धातुओं में इस्पात ने ऐतिहासिक रूप से एक प्रमुख स्थान हासिल किया है। अक्तूबर 2021 तक भारत 9.8 मीट्रिक टन के उत्पादन के साथ कच्चे इस्पात का दुनिया में ‘दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक’ था। वित्तीय वर्ष 2022 (जनवरी तक) में कच्चे इस्पात और तैयार इस्पात का उत्पादन क्रमशः 98.39 मीट्रिक टन एवं 92.82 मीट्रिक टन था।
वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान भारत में इस्पात की प्रति व्यक्ति खपत 10 प्रतिशत बढ़कर 77 किलोग्राम प्रति व्यक्ति हो गई। भारत ने वर्ष 2021-22 में 120 मिलियन टन से अधिक कच्चे इस्पात और 113.6 मिलियन टन तैयार इस्पात के रिकॉर्ड उत्पादन के साथ 13.5 मिलियन टन तैयार इस्पात का निर्यात किया है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी पावन सान्निध्य में माननीय केन्द्रीय मंत्री श्री रामप्रसाद सिंह जी, सुश्री गंगा नन्दिनी त्रिपाठी और नदियों का रूप धारण की नारियों ने नदियों और जल संरक्षण का संकल्प किया।