निर्वाचन आयोग ने राज्य में आगामी तीन महीनों तक चलने वाले विशेष अभियान की घोषणा की है, जिसके तहत डुप्लीकेट और संदिग्ध मतदाता पहचान संख्या (ईपीआईसी नंबर) को चिन्हित कर उन्हें यूनिक नंबर जारी किया जाएगा। यह कवायद केंद्रीय चुनाव आयोग के निर्देश पर पूरे देश में की जा रही है, जिसमें उत्तराखंड भी शामिल है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में राज्य में 85,19,271 पंजीकृत मतदाता हैं। इनके सत्यापन के लिए 11,729 बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) की नियुक्ति प्रक्रिया भी जारी है, जो बीएलओ की सहायता करेंगे।
यह होगा प्रक्रिया का हिस्सा:
• बीएलए अपने-अपने क्षेत्र के संदिग्ध या डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची तैयार करेंगे और उसे बीएलओ को सौंपेंगे।
• बीएलओ स्थल पर जाकर सत्यापन करेंगे और संस्तुति के आधार पर नाम संशोधन, विलोपन या समायोजन की कार्रवाई करेंगे।
• यदि कोई मतदाता आयोग की कार्रवाई से असंतुष्ट होता है, तो वह पहली अपील संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) से कर सकेगा।
• डीएम के निर्णय से भी असहमति होने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष दूसरी अपील का विकल्प खुला रहेगा।
डुप्लीकेट ईपीआईसी नंबर होंगे समाप्त
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन पुराने और नए मतदाताओं के ईपीआईसी नंबर समान हैं, उन्हें चिन्हित कर अलग-अलग यूनिक वोटर आईडी नंबर आवंटित किए जाएंगे, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की मतदाता सूची में गड़बड़ी को रोका जा सके।