प्रदेश के अशासकीय विद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती से जुड़ी समस्याओं का समाधान अब राज्य लोक सेवा आयोग (UKPSC) के माध्यम से किया जाएगा। यह कदम भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस संबंध में जानकारी दी कि अब से शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से लोक सेवा आयोग के अधीन होगी, जिससे सुनिश्चित किया जा सकेगा कि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में अशासकीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार की कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसके परिणामस्वरूप, 19 सितंबर 2023 से अशासकीय विद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, इस रोक के दौरान इन विद्यालयों में अस्थायी व्यवस्था के तहत पठन-पाठन कार्य जारी रहेगा, जिसे संस्थान खुद के खर्चे पर संचालित करेंगे।
अशासकीय महाविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया:
अशासकीय महाविद्यालयों में भी शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में रुकावटें आई थीं। कुछ संस्थानों में कोर्ट के आदेश के बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन यह प्रक्रिया भी पहले जैसी पारदर्शी नहीं थी। अब, सरकार ने इन महाविद्यालयों में भी भर्ती प्रक्रिया को राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया है।
भर्ती में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा:
डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि पहले जिन भर्तियों में भ्रष्टाचार की घटनाएं सामने आई थीं, उनके मद्देनजर अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष हो। इससे न केवल भर्ती प्रक्रिया में सुधार आएगा, बल्कि भ्रष्टाचार की समस्या पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।