राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के वेल में आकर नारेबाजी करना और अमर्यादित शब्दों के इस्तेमाल करने पर दूसरे दिन भी सदन में हंगामा हुआ। पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पीठ से बार-बार सदस्यों को बैठने का आग्रह करने के बाद भी माहौल शांत न होने से विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी नाराज व सख्त दिखीं। भाजपा विधायक आशा नौटियाल की ओर से उठाए गए व्यवस्था के प्रश्न पर विस अध्यक्ष ने विनिश्चय देते हुए मामले को आचार समिति को सौंपा।
संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा, राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस का जो रवैया था, उससे साफ है कि वह सदन नहीं चलने देना चाहती है। अभिभाषण के समय कांग्रेस विधायक ने जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया, वह उत्तराखंड की संस्कृति व सदन की गरिमा के खिलाफ है। मैंने आंशका जताई थी लेकिन यह नहीं कहा कि विधायक ने शराब पी रखी है। गलती पर माफी मांगने के बजाय कांग्रेस ने दूसरे दिन भी सदन हंगामा किया।
पूर्व विधायकों की पेंशन, भत्ते बढ़ोतरी समेत पांच विधेयक बुधवार को सदन पटल पर रखे गए। इनमें जमाकर्ताओं की सुरक्षा संबंधी विधेयक भी शामिल है।
सदन में संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने उत्तराखंड राज्य विधानसभा (सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन) संशोधन विधेयक-2025 पेश किया। इसके तहत अब पूर्व विधायक रेलवे कूपन की धनराशि 28,000 में से उपभोग करने के बाद बची हुई राशि नकद प्राप्त कर सकेंगे। उनकी पेंशन 40,000 से बढ़ाकर 60,000 करने, धारा-20 के तहत प्रतिवर्ष के हिसाब से प्रतिमाह मिलने वाली राशि 2500 से बढ़ाकर 3000 रुपये करने, जीपीएफ ब्याज दर पर 25 लाख रुपये तक का ऋण 10 साल तक स्वीकृत करने का प्रस्ताव शामिल है।
इसी तरह, उत्तराखंड निक्षेपक (जमाकर्ता), हित संरक्षण (वित्तीय अधिष्ठानों में) निरसन विधेयक-2025, उत्तराखंड नगर निकायों एपं प्राधिकरणों हेतु विशेष प्रावधान संशोधन विधेयक-2025, उत्तराखंड निरसन विधेयक-2025, उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास संशोधन विधेयक-2025 भी सदन पटल पर रखे गए।
प्रदेश में 57 ऐसे अप्रचलित विधेयक हैं, जो कि अब अस्तित्व में नहीं रहे हैं। इन सभी विधेयकों को खत्म करने के लिए सरकार सदन में उत्तराखंड निरसन विधेयक लाई है। इनमें तमाम ऐसे विधेयक हैं जो कि उत्तर प्रदेश के जमाने के हैं और पूर्व के वर्षों में राज्य में लागू किए गए थे। निरस्त होने वाले विधेयकों में उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम से लेकर पंचायत कानून संशोधन अधिनियम, उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायती राज अधिनियम, ऋण मोचन अधिनियम आदि शामिल हैं।