: लोनिवि के घटते बजट से सड़क विकास योजनाओं को झटका, 3 वर्षों से लगातार हो रही कटौती

उत्तराखंड सरकार जहां एक ओर राज्य में सड़क नेटवर्क के विस्तार और यातायात के दबाव को कम करने के लिए मेगा प्रोजेक्ट शुरू कर रही है, वहीं दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग (PWD) के बजट में लगातार कटौती से विकास योजनाएं प्रभावित होने लगी हैं। पिछले तीन वित्तीय वर्षों से लोनिवि के पूंजीगत और राजस्व मद में बजट घटता जा रहा है, जिससे सड़क निर्माण और रखरखाव की गति धीमी पड़ गई है।

लगातार घट रहा है पूंजीगत बजट
वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो:

2023-24 में पूंजीगत मद में ₹1666.32 करोड़ और राजस्व मद में ₹1339.35 करोड़ आवंटित किए गए थे।
2024-25 में पूंजीगत बजट घटकर ₹1440.30 करोड़ हो गया, जबकि राजस्व मद बढ़कर ₹1776.96 करोड़ हो गया।
2025-26 के ताजा बजट में पूंजीगत मद और घटकर ₹1310.70 करोड़ हो गया है, जबकि राजस्व मद में ₹1638.64 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
सड़क निर्माण लक्ष्य में भी कटौती
बजट में कमी के साथ-साथ नए मार्गों के निर्माण लक्ष्य में भी कटौती की गई है।

2024-25 में 290 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य था,
लेकिन 2025-26 में यह घटाकर केवल 220 किमी कर दिया गया है।
इसका मतलब है कि नए वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन औसतन 1 किमी से भी कम सड़क का निर्माण होगा, जो पहाड़ी और आपदाग्रस्त राज्य के लिए चिंताजनक संकेत है।

आपदा प्रबंधन के लिए रखरखाव बजट भी घटा
उत्तराखंड में अक्सर भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से सड़कों को भारी नुकसान होता है। इसके बावजूद इस वर्ष सड़क मरम्मत और आपदा प्रबंधन मद में भी बजट घटा है:

2023-24 में ₹475 करोड़ थे,
जो अब 2025-26 में घटकर ₹404 करोड़ रह गए हैं।
अधिकारियों की चिंता
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज पांडेय ने इस बजट कटौती को लेकर स्पष्ट चिंता जताई। उन्होंने कहा,

“लोक निर्माण विभाग का बजट कम हुआ है, जिससे हमारी कई योजनाओं को लागू करने में दिक्कत आएगी। सड़कें राज्य की जीवनरेखा हैं, और हमें इसके लिए पर्याप्त संसाधनों की जरूरत है।”

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़कों का निर्माण और रखरखाव न केवल विकास की रीढ़ है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं और आपदा राहत में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में लोनिवि के बजट में लगातार हो रही कटौती से राज्य की सामाजिक और आर्थिक गतिशीलता पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों और अधिकारियों की मांग है कि सड़क निर्माण को प्राथमिकता में रखते हुए बजट का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।

प्रमुख बिंदु:

PWD का पूंजीगत बजट तीन वर्षों से घट रहा है
नए मार्गों के निर्माण का लक्ष्य घटकर 220 किमी
सड़क रखरखाव और आपदा राहत बजट में भी कटौती
विभागीय सचिव ने योजनाएं प्रभावित होने की आशंका जताई

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