राजयोग ध्यान में महिलाओं के सम्मान में ‘बेटी बचाओ सशक्त बनाओ’ कार्यक्रम

सूरजरोहिला / जुलाना (जींद) । जुलाना के राज योग ध्यान केंद्र में महिलाओं के सम्मान में विशेष बेटी बचाओ सशक्त बनाओ, कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया । कार्यक्रम का आयोजन बी.के दीदी नासिका की देख रेख में किया गया ।

कार्यक्रम की शुरुवात बीके दादी जानकी जी और बीके दादी गुलज़ार जी को श्रद्धांजलि देकर उनकी प्रतिमाओं पर फूल मालाएं पहनाकर पुष्प अर्पित करके की गई ।

कार्यक्रम की शुरुआत में कुमारी योगिता द्वारा शुभ स्वागतम स्वागत गीत गाकर की गई और उसके बाद बीके दादी जानकी जी और बीके दादी गुलजार जी को श्रद्धांजलि दी गई ।

श्रद्धांजलि देते समय बहन संतोष, बिमला माताजी, भाई विष्णु, बॉक्सर सूरज रोहिला , राजो माताजी, बहन बिंदु और बहन सीमा मंच पर उपस्थित रही ।

श्रद्धांजलि के बाद आंचल, पायल और सृष्टि ने नारी शक्ति मैं आज की नारी पर अपनी प्रतिभा दिखाई, इसके बाद कुमारी इशिका ने मैं अबला नहीं सबला हूं कविता सुनाई । कविता के बाद आदि ने माया मोहिनी ने आज का रावण डायलॉग पर अपना एक्ट किया जिसमें दर्शाया गया कि आज की नारी नए पहनावे पर कितना ध्यान रखती हैं और अपनी मर्यादा भूल कर कितना दिखावा करती हैं । इसके बाद कुमारी नैंसी ने हम आए तेरे द्वार दे दे हमको शरण भजन पर अपनी प्रस्तुति दी ।

कार्यक्रम में कन्या गुरुकुल स्कूल जुलाना की प्राचार्य मैडम कौशल्या, मैडम शर्मा, कन्या गुरुकुल स्कूल में क्लर्क बहन सरोज, मैडम सरला, अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सिंग खिलाड़ी सूरज रोहिला , अंतरराष्ट्रीय मार्शल आर्ट खिलाड़ी प्रीति रोहिला , पोली गांव से विष्णु भाई सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे ।

बीके नासिका दीदी ने बताया कि आज का कार्यक्रम महिलाओं के सम्मान के लिए और बीके दादी जानकी जी और बीके दादी गुलज़ार जी को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया गया जिसमें हमनें 9 कन्याओं को भोग भी लगाया ।

बहन नासिका ने कहा कि आज के समय में छोटी छोटी बातों को लेकर परिवार में बड़ा झगड़ा हो जाता है इससे बचने के लिए हमे खुद के मन को काबू करना चाहिए और बड़ों का आदर मान करना चाहिए ।

कार्यक्रम में बॉक्सिंग खिलाड़ी सूरज रोहिला ने संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में लड़कियां लड़कों से पीछे नहीं हैं जरूरत है तो उनके सहयोग करने की, उनको बाहर की दुनियां दिखाने की, जरूरत है तो उनको पढ़ने के लिए और खेलों में भाग लेने की आजादी देने की ।

कार्यक्रम का समापन कन्याओं को भोग लगाकर और उनकी आरती उतार कर की गई ।

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