उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास में यह महज दूसरा मौका है, जब किसी ज़िलाधिकारी को उनके पद पर रहते हुए निलंबित भी किया गया है। इससे पहले वर्ष 2003 में पटवारी भर्ती घोटाले के दौरान पौड़ी के तत्कालीन डीएम एसके लांबा को भी सस्पेंड किया गया था। साल 2002 में पौड़ी जिले में हुई पटवारी भर्ती में गंभीर अनियमितताएं भी सामने आई थीं। शिकायतों में बताया गया कि कई ऐसे अभ्यर्थियों का चयन भी कर लिया गया, जिन्होंने आवेदन ही नहीं किया था। जांच में तत्कालीन डीएम एसके लांबा की भूमिका संदिग्ध भी पाई गई और तत्कालीन राज्य सरकार ने उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित भी कर दिया। बाद में उनकी सेवा से बर्खास्तगी भी की गई थी। अब, हरिद्वार में सामने आए जमीन घोटाले में भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को डीएम कर्मेन्द्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह सहित कुल 7 अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया गया। इससे पहले भी 5 अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि जिन 2 आईएएस अधिकारियों को पहली बार फील्ड में बड़ी ज़िम्मेदारी दी गई थी, वे अब सीधे भ्रष्टाचार के घेरे में ही आ गए हैं।
- आईएएस कर्मेन्द्र सिंह को बतौर ज़िलाधिकारी पहली बार ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।
- आईएएस वरुण चौधरी को बतौर नगर आयुक्त पहली बड़ी जिम्मेदारी मिली थी।