केदारनाथ विधानसभा की पूर्व विधायक स्व. शैलारानी रावत की पुत्री ऐश्वर्या रावत ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद, ऐश्वर्या रावत ने अपनी नई जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए कहा कि वह इसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं की मदद करना और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना होगा।
स्व. शैलारानी रावत के निधन के बाद यह सवाल उठ रहा था कि उनकी राजनीतिक विरासत को कौन संभालेगा। केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव में ऐश्वर्या रावत को प्रमुख दावेदार माना जा रहा था, और वह बीजेपी के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग ले रही थीं। अब, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त कर उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत की है।
महिलाओं के अधिकारों और सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्धता
नई जिम्मेदारी के बारे में बात करते हुए, ऐश्वर्या रावत ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और उनके लिए काम करना है। उन्होंने कहा, “मैं महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, घरेलू हिंसा को रोकने और जरूरतमंद महिलाओं की मदद करने के लिए ठोस कदम उठाऊंगी।”
इसके साथ ही ऐश्वर्या ने महिलाओं के सशक्तीकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने अपील की कि महिलाएं अपनी योग्यता, शिक्षा और संस्कारों पर विश्वास करें, जिससे समाज में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी आएगी और सोच में बदलाव होगा।
नाबालिग विवाह पर गहरी चिंता
ऐश्वर्या रावत ने नाबालिग विवाह के मामलों को गंभीर चिंता का विषय बताया और इस पर गहरे विचार-विमर्श की आवश्यकता जताई। उनका मानना है कि महिलाओं के अधिकारों और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए इस विषय पर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
दिवंगत मां के सपनों को पूरा करने की प्रतिबद्धता
अपनी दिवंगत मां स्व. शैलारानी रावत के सपनों और अधूरे कार्यों को पूरा करने का वादा करते हुए ऐश्वर्या ने कहा, “मैं अपनी मां के द्वारा किए गए कार्यों को आगे बढ़ाऊंगी और उनके अधूरे कार्यों को पूरा करूंगी।”