रुद्रप्रयाग जिले में घोड़े-खच्चरों में इक्वाइन इन्फ्लुएंजा (संक्रामक रोग) की पुष्टि के बाद, उत्तराखंड सरकार अब पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। राज्य के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर एक बैठक आयोजित की और घोड़े-खच्चरों की अनिवार्य स्वास्थ्य जांच के निर्देश दिए हैं।
मंत्री सौरभ बहुगुणा ने सचिवालय में हुई बैठक में बताया कि रुद्रप्रयाग के वीरोन और बस्ती गांव में इस घातक रोग का प्रकोप पाया गया है। इसके बाद, मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए घोड़े और खच्चरों की स्वास्थ्य जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यात्रा के दौरान कोई भी रोगग्रस्त पशु यात्रा में शामिल न हो सके।
सीमाओं पर स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था:
सौरभ बहुगुणा ने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी, बागेश्वर, और चमोली जिलों के साथ-साथ प्रदेश की सभी सीमाओं पर स्थित पशु रोग नियंत्रण चौकियों पर घोड़े और खच्चरों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए। साथ ही, अन्य सीमावर्ती राज्यों से यात्रा के दौरान प्रदेश में प्रवेश करने वाले सभी घोड़े और खच्चरों को स्वास्थ्य परीक्षण प्रमाणपत्र और इक्वाइन इन्फ्लुएंजा की निगेटिव रिपोर्ट के साथ ही प्रदेश में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
क्वारंटीन केंद्रों की स्थापना और दवाओं की उपलब्धता:
पशुपालन मंत्री ने रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वे जिले में क्वारंटीन केंद्र की स्थापना करें ताकि रोग के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इसके अलावा, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। मंत्री ने कहा कि इन निर्देशों के पालन में किसी प्रकार की शिथिलता न हो और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का सतर्क रुख:
सरकार ने पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की ढिलाई को गंभीरता से लिया है और इस संदर्भ में अधिकारियों को पूरी तरह से सक्रिय रहने का आदेश भी दिया है। सरकार इस संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य संकट को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है।