सोशल मीडिया पर सहकारिता विभाग और मंत्री के खिलाफ फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों को लेकर विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। अपर निबंधक सहकारिता ईरा उप्रेती ने बुधवार को स्पष्ट रूप से कहा कि कुछ शरारती तत्व जानबूझकर गलत तथ्यों के आधार पर विभाग और सहकारिता मंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से सोशल मीडिया पर चर्चित लोनी अर्बन कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) का उल्लेख करते हुए कहा कि “इस सोसाइटी का सहकारिता विभाग से कोई संबंध नहीं है और न ही यह विभाग में पंजीकृत है। यह अफवाहें पूर्ण रूप से झूठ और गुमराह करने वाली हैं।”
आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की चेतावनी
ईरा उप्रेती ने कहा कि सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66 के अंतर्गत तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में मानहानि का मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “यदि कोई व्यक्ति फेसबुक, व्हाट्सएप या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दुष्प्रचार, मिथ्या आरोप या आपत्तिजनक टिप्पणियों के माध्यम से विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
सत्यापन के बाद ही करें पोस्ट: विभाग की अपील
ईरा उप्रेती ने आमजन व सोशल मीडिया यूज़र्स से अपील की है कि किसी भी समाचार या पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। उन्होंने कहा, “बिना पुष्टि के किसी भी भ्रामक जानकारी को आगे बढ़ाना न केवल गलत है, बल्कि कानूनी अपराध भी बन सकता है।”
संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की आवश्यकता
सहकारिता विभाग का यह सख्त रुख ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर अफवाहें तेज़ी से फैलती हैं और जनता की धारणा को प्रभावित करती हैं। विभाग का कहना है कि वह सभी सोशल मीडिया गतिविधियों पर निगरानी रखे हुए है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों या संस्थानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।